योगी जी ये है आपका स्वास्थ्य महकमा, 10 KM साइकिल से ले जानी पड़ी मासूम की लाश

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कौशांबी। अखिलेश-राज में स्वास्थ्य महकमे के कई गंभीर मामले चर्चा का विषय बने रहे, उन मामलों को विपक्षियों ने एक बड़ा मुद्दा बनाकर तत्कालीन सरकार की घेराबंदी की। सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही बड़े दावे शुरू हुए, लेकिन तस्वीरें कुछ और ही बयान करती हैं। मामला कौशांबी का है, जहां स्वास्थ्य विभाग की बदहाली का शिकार एक छह माह की मासूम बन गयी है। तस्वीरें सरकारी मशीनरी की संवेदनहीनता की पोल खोल रही हैं।

यहां एक युवक को अपनी भांजी की डेड बॉडी को मजबूरन कंधे पर लादकर 10 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय करना पड़ा क्योंकि एम्बुलेंस के लिये घूस में मांगी जा रही 800 रुपये की रकम उसके पास नहीं थी। आरोप है कि जब सरकारी अस्पताल से एंबुलेंस मांगी गई तो उनसे आठ सौ रुपए की मांग की गयी। पैसे न होने की वजह से उन्हें एंबुलेंस सेवा नहीं दी गयी। हर बार की तरह विभागीय अफसर जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड लेते हैं, लेकिन क्या महज जांच से दोषियों को सजा मिल सकेगी? कौशांबी के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा मामले की मजिस्ट्रेटी जांच की बात कह रहे हैं।



ये है पूरा मामला—

कौशांभी के सिराथू तहसील के मलाकसद्दी गांव के रहने वाले अनंत कुमार की छह माह की बेटी पूनम को सोमवार की सुबह अचानक उल्टी दस्त होने लगी। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान दोपहर करीब एक बजे उसकी मौत हो गई। परिजनो का आरोप है कि पूनम की तबीयत खराब होने पर सब अस्पताल एंबुलेंस से गए थे लेकिन पूनम की मौत के बाद जब हमने अस्पताल वालों से एंबुलेंस की मांग की तो किसी ने कोई मदद नहीं की।

एंबुलेंस के लिए मांगे 800 रुपये, चालक ने कहा तेल नहीं गाड़ी में—

पूनम के पिता का कहने है एंबुलेंस मांगने पर 800 रुपये मांगे गए जब हमने पैसे न होने की बात कही तो चालक ने कहा कि गाड़ी में तेल नहीं है। इसी बीच मृतका पूनम के मामा बृजमोहन वहां पहुंचे और परिजनों को रोते बिलखते देख अपनी भांजी के शव को कंधे पर उठा कर एक हाथ से साइकल चलाते हुये शव को 10 किलोमीटर दूर लेकर गांव पहुंचा।




डॉक्टर और एंबुलेंस चालक पर मुकदमा दर्ज—

मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद डीएम ने आनन-फानन में सीएमओ डा. एसके उपाध्याय को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व एंबुलेंस चालक पर मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।

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