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अवैध खनन से सरकार को लगी करोड़ों की चपत, कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अनधिकृत खनन गतिविधियों के चलते सैकड़ों करोड़ रुपए का राजस्व राज्य को नहीं मिल पाया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। कैग की 2015-16 के लिए राजस्व क्षेत्र की आडिट रिपोर्ट गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई। इसमें कहा गया कि अनधिकृत खनन गतिविधियों के कारण उत्तर प्रदेश को 477.93 करोड़ रुपए का राजस्व नहीं मिल पाया।




रिपोर्ट में कहा गया कि भूगर्भ एवं खनन विभाग ने अनिवार्य तिमाही रिटर्न दाखिल किए जाने की निगरानी नहीं की। दरें संशोधित होने पर रायल्टी के अंतर की राशि नहीं वसूली और खनिज के मूल्य का आकलन एवं रॉयल्टी देर से भुगतान किए जाने पर ब्याज का आकलन नहीं किया। कैग ने कहा कि संबद्ध जिला खनन अधिकारियों ने उन तथ्यों की जांच नहीं की, जिनकी वजह से बालू और पत्थर की अनधिकृत खुदाई की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि पर्यावरण मंजूरी के बिना खनिजों की खुदाई से सरकार को 179.57 करोड़ रुपए नहीं मिल पाए।

यूपी में प्रमुख नदियों के जल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है और इसकी मुख्य वजह सीवेज और औद्योगिक कचरे का पर्याप्त ‘ट्रीटमेंट’ नहीं होता है। कैग की आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी एक रिपोर्ट में कहा गया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम अधिकारियों और उद्योगों जैसे चूककर्ताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में विफल रहा। कैग की रिपोर्ट गुरुवार को विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नदियों के प्रदूषण स्तर की निगरानी करता है।




वह इसके लिए हर महीने नमूने एकत्र करता है। आडिट के दौरान 12 प्रमुख नदियों और छह जलाशयों की रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया। कैग ने कहा कि गंगा नदी के प्रदूषण की मुख्य वजह सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं होना तथा औद्योगिक कचरा है। आडिट के दौरान पाया गया कि नदी में जल की गुणवत्ता सही नहीं है। राजधानी लखनऊ से होकर बहने वाली गोमती नदी के जल की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

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