योगी के मंत्री एसपी सिंह बघेल को फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट का नोटिस

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लखनऊ। फिरोजाबाद की टूंडला विधानसभा सीट से विधायक और यूपी की योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। बघेल के निर्वाचन को उनके जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनौती दी गई है। पिछड़ी जाति से आने वाले बघेल ​जिस टूंडला विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे वह अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित थी। प्रत्याशी बनने के लिए बघेल ने जो प्रमाण पत्र अपने घोषणा पत्र के साथ प्रस्तुत किया था उसमें उन्होंने स्वयं को अनुसूचित जाति वर्ग का बताया है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में बघेल के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए उनके निर्वाचान को चुनौती दी गई है। बघेल के खिलाफ याचिका की सुनवाई कर रही जस्टिस वीके शुक्ला की बेंच ने 6 सप्ताह के भीतर उनका जवाब मांगा है।




मिली जानकारी के मुताबिक एसपी सिंह बघेल यूपी सरकार के पशुपाल, लघु सिंचाई और मत्सय पालन विभाग के मंत्री हैं और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला हुआ है। तीन बार बीेजेपी से सांसद रहे बघेल बीजेपी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। मूल रूप से यूपी के औरैया से आने वाले बघेल गड़रिया जाति से आते हैं।

पूर्व के चुनावों में बतौर प्रत्याशी वह जाति प्रमाण पत्र में स्वयं को पिछड़ा वर्ग का बताते रहे हैं। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित टूंडला सीट से चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने स्वयं के घनगड यानी धानुक होने का प्रमाण पत्र दिया है। यह प्रमाण पत्र उन्होंने आगरा से प्राप्त किया है।




इसी आधार पर बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। यदि वह पिछड़ा वर्ग से आते हैं और उन्होंने स्वयं को फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का होने का प्रमाण पत्र दिया है तो निश्चित तौर पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है और उनके निर्वाचन को रद्द किया जा सकता है।

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