एक निर्जला एकादशी व्रत से मिलता है 24 एकादशियों का पुण्य

लखनऊ। आज निर्जला एकादशी है। हमारे हिन्दू धर्म में निर्जला एकादशी का बहुत महत्त्व होता है। आपको बता दें कि साल में 24 एकादशी होती हैं और अगर आप 24 एकदशी व्रत नहीं रख पाते हैं तो आप निर्जला एकादशी व्रत से 24 एकादशियों का पुण्य कमा सकते हैं। निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी और भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं।




निर्जला एकादशी व्रत से व्यक्ति को दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन बिना पानी पिए जरूरतमंद आदमी को हर हाल में शुद्ध पानी से भरा हुआ घड़ा दान करना चाहिए। इस व्रत को रखने से आर्थिक, पारिवारिक, बीमारी, क्लेश सभी तरह की परेशानी से मुक्ति मिलती है। व्रत रख कर शाम में ब्राह्मण को भोजन करवाकर जल से भरा कलश, फल, शक्कर, अनाज, वस्त्र, जूता, छतरी, पंखा आदि दान करें और फिर व्रत तोड़े।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

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एक बार पाण्डु पुत्र भीमसेन ने श्रील वेदव्यास जी से पूछा, ‘हे परमपूजनीय विद्वान पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं व मुझे भी करने के लिए कहते हैं। किन्तु मुझसे भूखा नहीं रहा जाता। आप कृपा करके मुझे बताएं कि उपवास किए बिना एकादशी का फल कैसे मिल सकता है?’




श्रीलवेदव्यासजी बोले,’पुत्र भीम! यदि आपको स्वर्ग बड़ा प्रिय लगता है, वहां जाने की इच्छा है और नरक से डर लगता है तो हर महीने की दोनों एकादशी को व्रत करना ही होगा।’

भीम सेन ने जब ये कहा कि यह उनसे नहीं हो पाएगा तो श्रीलवेदव्यास जी बोले, ‘ज्येष्ठ महीने के शुल्क पक्ष की एकादशी को व्रत करना। उसे निर्जला एकादशी कहते हैं। उस दिन अन्न तो क्या, पानी भी नहीं पीना। एकादशी के अगले दिन प्रातः काल स्नान करके, स्वर्ण व जल दान करना। बाद में पारण के समय (व्रत खोलने का समय) ब्राह्मणों व परिवार के साथ अन्नादि ग्रहण करके अपने व्रत को विश्राम देना।

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जो एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पिये रहता है तथा पूरी विधि से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशियां आती हैं। उन सब एकादशियों का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से सहज ही मिल जाता है।’यह सुनकर भीम सेन उस दिन से इस निर्जला एकादशी के व्रत का पालन करने लगे अौर वे पाप मुक्त हो गए।