CBI छापेमारी से ठीक पहले बंद हुआ प्रणव रॉय का चैनल, जाने क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। सोमवार की सुबह जो देश की सबसे बड़ी सुर्खी बनी NDTV में मालिक प्रणव रॉय के ठिकानों पर सीबीआई (CBI) के छापे। यह खबर आते ही लोगों की सबसे पहली प्रतिक्रिया थी कि दो दिन पहले ही एनडीटीवी के अंग्रेजी चैनल की एक एंकर ने भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को अपने लाइव डिबेट शो से भगा दिया था, जिस वजह से प्रणव रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की। वहीं एनडीटीवी के लिए इससे बड़ी बुरी खबर ​4 जून यानी रविवार को आई थी। उसे अपने बिजनेस सेग्मेंट के अग्रेजी चैनल NDTV Profit को ताला लगाना पड़ा। NDTV Profit लंबे समय से नुकसान में चल रहा था और पिछले दो सालों से उसकी टीआरपी अपने सेग्मेंट के अन्य चैनलों के मुकाबले सबसे कम थी।




प्रणव रॉय के ठिकानों पर हुई सीबीआई की छापेमारी एनडीटीवी चैनल समेंत देश के तमाम मीडिया समूहों के लिए हैरान करने वाली खबर थी। दोपहर तक यह खबर कुछ न्यूज वेबसाइट्स ने ही रिपोर्ट की लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे न्यूज चैनल्स ने भी इस खबर को दिखाना शुरू किया। लेकिन इस बीच आम लोगों के बीच यह खोज का विषय रहा कि सूचिता की पत्रकारिता के कारण अलग पहचान रखने वाले एनडीटीवी के मालिकान ने ऐसा क्या किया कि उनके यहां सीबीआई की छापेमारी हुई। क्या ये महज बदले के लिए अंजाम दी गई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मंशा का प्रदर्शन है या चैनल के मालिकों के काले कारनामों का परिणाम?

क्यों हुई छापेमारी—

एनडीटीवी पर एक विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करने का आरोप सालों से लगता आ रहा है। इसके बावजूद उसकी खबरें और कई कार्यक्रम देश के एक बुद्धिजीवी वर्ग को अपनी ओर आ​कर्षित करते रहे हैं। लेकिन लोगों की नजर कभी उस पहलू पर नहीं गई जो कथित रूप से एनडीटीवी के मालिकानों के काले कारनामों से जुड़ा है।

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सोमवार को हुई सीबीआई की कार्रवाई के पीछे दो वजहें बताई जा रहीं हैं। पहली है एनडीटीवी और उसकी प्रमोटर कंपनी आरआरपीआर द्वारा आईसीआईसीआई बैंक से लोन लेने के लिए की गई धोखाधड़ी। एनडीटीवी के मालिक प्रणव रॉय और उनकी पत्नी पर बैंक के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने की शिकायत बैंक द्वारा सीबीआई की बैंकिग फ्राड से जुड़ी विशेष शाखा में दर्ज करवाई गई थी।




बैंक द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक 2008 में एनडीटीवी के मालिक प्रणव रॉय, पत्नी राधिका रॉय और आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने निजी गारंटी पर आईसीआईसी बैंक से धोखाधड़ी कर 366 करोड़ का लोन लिया था। इस लोन को लेने के लिए एनडीटीवी चैनल को संपत्ति के रूप में दिखाया गया था। इस रकम में से करीब 92 करोड़ रुपए प्रणव रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के निजी खातों में भेजे गए। कहा जाता है लोन के ब्याज का भुगतान करने में असमर्थ रहने पर बैंक से हुए समझौते से बैंक को 50 करोड़ के घाटे का सामना करना पड़ा।




इस पूरे प्रकरण में बैंक के कुछ अधिकारियों की मिली भगत से धोखाधड़ी की बात सामने आई। एनडीटीवी चैनल के शेयरों की गिरती कीमत और लगातार बढ़ते घाटे को छुपाकर कंपनी ने चैनल की झूठी हैसियत दिखाकर एक बड़ा लोन ले​ लिया था। जिस वजह से कंपनी न तो अपना पूरा लोन चुका पाई और न ही उसका ब्याज। इसी आधार पर आईसीआईसी बैंक ने अपनी बैंक के अधिकारियों, एनडीटीवी के मालिक और उसकी होर्डिंग कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था।

क्वांटम सिक्योरिटीज ने भी प्रणव रॉय को बताया धोखेबाज—

एनडीटीवी के शेयरधारकों में सबसे बड़ा नाम है क्वांटम सिक्यिोरिटीज का। एनडीटीवी के 125000 शेयर अपने पास रखने वाली कंपनी क्वांटम सिक्योरिटीज ने 2013 में प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग में एनडीटीवी और उसके प्रमोटर्स यानी मालिकों के खिलाफ कई कानूनों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज करवाई थी। क्वांटम सिक्योरिटीज के डायरेक्टर की शिकायत पर दो सालों तक दोनों जांच एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद कंपनी ने 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दोनों जांच एजेंसियों को कटघरे में खड़ा कर दिया।




बताया जाता है कि क्वांटम सिक्योरिटीज के अदालत में जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने एनडीटीवी और उसके प्रमोटर्स को नवंबर 2016 में शो कॉज नोटिस जारी किया। जिसमें उनसे 2007—10 के विदेशी निवेश के रुप में जुटाए गए 2030 करोड़ के निवेश का हिसाब किताब मांगा गया।




कथित रुप से एनडीटीवी पर पूर्व में भी विदेशों से फंडिंग के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन अब इस चैनल पर अपने ही एक बड़े शेयरधारक द्वारा गैरकानूनी तरीके से 2000 करोड़ से ज्यादा की रकम भारत में लाने के आरोप लगे हैं। सूत्रों की माने तो प्रणव रॉय पर आरोप है कि उन्होंने टैक्स हैवन कहे जाने वाले कई देशों में कागजी कंपनियां बनाकर निवेश जुटाया और उन कंपनियों को मिली रकम को विदेशी निवेश के रुप में एनडीटीवी चैनल में ट्रांसफर करवाया गया। जिसके बाद विदेश में बनीं कंपनियों को खत्म कर दिया गया।




एनडीटीवी चैनल के मालिकों के इस कारनामे को हवाला की तरह देखा जा रहा है। इस मामले में विदेशी निवेश को भारत में लाने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पी चिदंबरम ने एनडीटीवी को विदेशी निवेश को लाने के लिए रास्ता तैयार किया था, जिसके बदले में पी चिदंबरम के बेटे कार्तिक को फायदा मिला था।

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