असम के सीएम बीरेन सिंह के बेटे को सजा दिलवाने के लिए धरने पर बैठा पीड़ित परिवार

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नई दिल्ली। दिल्ली के इंडिया गेट पर असम का एक परिवार कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ न्याय की गुहार लगाते हुए धरने पर बैठा है। इस परिवार की लड़ाई असम के सबसे ताकतवर नेता और मौजूदा सीएम बीरेन सिंह के खिलाफ है। परिवार का कहना है कि 2011 में होली वाले दिन उनके इकलौते बेटे को बीरेन सिंह के बेटे एन अजय ने गोली मार दी थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी। घटना को हुए छह साल बीत चुके हैं, बीरेन सिंह के बेटे पर निचली अदालत में दोष सिद्ध हो चुका है, इसके बावजूद अपने सियासी रसूख के बल पर हत्या का दोषी अजय आजाद घूम रहा है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार है जिसे न्याय की लड़ाई में हर कदम मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।




शुक्रवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर अपने 19 साल के बेटे इरोम रोजर के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए 56 वर्षीय चित्रा रोजर और उनके पति ने धरना देना शुरू किया है। चित्रा का कहना है कि वह अपने बेटे के हत्यारे को सजा दिलवाना चाहतीं हैं लेकिन असम में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर अपने बेटे के ​लिए इंसाफ दिलाने वादा चाहतीं हैं।

चित्रा का कहना है कि बीरेन सिंह के बेटे ने 2011 में होली वाले दिन उनकी बेटे की हत्या की थी। उस समय बीरेन सिंह असम सरकार में मंत्री हुआ करते थे। मामले की गंभीरता और सरकार के मंत्री के बेटे से जुड़ा मामला होने के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री इबोई सिंह ने सीबीआई जांच की आदेश जारी कर दिए थे। सीबीआई ने इस मामले की जांच के बाद 2012 सीबीआई विशेष अदालत के सामने चा​र्जशीट भी दाखिल कर दी। जनवरी 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत ने अजय को पांच साल कारावास की सजा सुनाई। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई और अजय को जमानत पर​ रिहा हो गया। इस मामले में सीबीआई के जिम्मेदार अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध मालूम होती है क्योंकि उन्होंने हाईकोर्ट के सामने दोषी की जमानत का न तो कोई विरोध किया और न ही कोई अपील की।




छह साल पहले अपने इकालौते बेटे को खो चुकीं चित्रा कहतीं हैं कि वह इंसाफ की लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहतीं है लेकिन मणिपुर का कोई वकील उनका पक्ष अदालत में रखने को तैयार नहीं है। हाल ही में एक सामाजिक संगठन के सहयोग से दिल्ली के एक वकील ने उनका साथ देने की ठानी तो उस वकील को भी धमकियां मिल रहीं हैं। उनके जिस रिश्तेदार ने वकील को एयरपोर्ट से रिसीव कर अदालत तक पहुंचाया उसे ​भी पिछले दिनों असम पुलिस ने हिरासत में लेकर माओवादियों घोषित कर दिया।

सीएम बीरेन सिंह पर अपने परिवार को प्र​ताड़ित करने के आरोप लगाते हुए चित्रा कहतीं हैं कि उनके बेटे के हत्यारे का पिता एक ताकतवर राजनेता है। पहले वह केवल मंत्री हुआ करते थे लेकिन आज वह सीएम हैं उनकी ताकत और बढ़ गई है। वह कहतीं हैं कि उन पर रात दिन नजर रखी जाती है। उनके घर को जाने वाली गली पर पुलिस की दो गाड़ियां रात भर खड़ी रहतीं हैं। जो भी उनकी मदद के लिए आगे आने की कोशिश करता है उसे धमकी दी जाती है।




अपने बेटे की मौत को याद करते ही आसुंओं से भर आई चित्रा की आंखे बयान कर देतीं हैं कि उनकी जिन्दगी में अब कुछ बचा है तो वह है अपने बेटे को इंसाफ दिलाना। इकलौते बेटे को खोने का दर्द और उसके हत्यारे को सजा दिलाने की लड़ाई ने उन्हें किस हद तक तोड़ा दिया है यह उनके चेहरे से साफ झलकता है, लेकिन उन्होंने अभी हार नहीं मानी है। शायद उन्हें अभी भी देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है।

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