शहर में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, LDA से पूछा- इसके लिए कौन अफसर जिम्मेदार

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लखनऊ| शहर के अवैध निर्माण पर लखनऊ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है| कोर्ट ने एलडीए से पूछा है कि शहर में पिछले पंद्रह साल में हुए अवैध निर्माणों के लिए कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार हैं| कोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर चार दिन में हमें जानकारी दी जाए| इतना ही नहीं कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाई करने का भी आदेश दिया है|




हाईकोर्ट में मोहम्मद तौहीद की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस वीरेंद्र कुमार ने सुनवाई की| याचिका में अतिक्रमणों को हटाने और अवैध निर्माण को तोड़ने की गुजारिश की गई| इस पर एलडीए के वकील ने कहा कि अतिक्रमण व अवैध निर्माण हटाने के लिए उसे पुलिस बल की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि ऐसे अभियानों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर रहता है| इस पर कोर्ट ने एसएसपी और डीजीपी को ऐसे अभियानों के दौरान एलडीए को पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मुहैया कराने के निर्देश दिए|

वहीँ, पिछली सुनवाई के दौरान याचिका पर जवाब देते हुए नगर निगम की ओर से कहा गया था कि जहां के अवैध निर्माण की बात याचिका में उठाई गई है, वह कॉलोनी एलडीए ने अब तक नगर निगम को हैंडओवर नहीं की है| इस पर हाई कोर्ट ने एलडीए का पक्ष जानना चाहा तो उसकी ओर से कोई जवाब ही नहीं दिया गया| इस पर कोर्ट ने शहरभर के अवैध निर्माणों की स्थिति की जानकारी मांग ली|




हाईकोर्ट ने एलडीए से पूछा कि अवैध निर्माणों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? क्या अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कोई भी वास्तविक और प्रभावी कदम उठाए गए? कोर्ट ने यह भी पूछा कि जिन अधिकारियों के प्रश्रय में अवैध निर्माण हुए, उन पर क्या कार्रवाई की गई? इस पर वीसी ने कोर्ट को बताया कि एलडीए हर अवैध निर्माण पर कार्रवाई करता है| कोर्ट ने वीसी से 30 मई तक अवैध निर्माणों के खिलाफ अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा है|

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