स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर रहा नंबर वन, ए2जेड की रही अहम भूमिका

नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा करवाए गए स्वच्छता सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के इंदौर को प्रथम स्थान मिला है, जबकि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इस सर्वेक्षण में दूसरे स्थान पर रहा। 2016—17 के लिए हुए सर्वेक्षण में हमेशा नंबर वन रहने वाले कर्नाटक के मैसूर को इस बार चार स्थानों का नुकसान हुआ है। अब मैसूर स्वच्छता रैंकिंग में 5वें स्थान पर है।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिलने के बाद शहर के कचरे का निस्तारण करने वाली कंपनी ए2जेड लिमिटेड के हौसले बुलंद हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित मित्तल का कहना है कि इंदौर शहर की इस उप​लब्धि का पूरा श्रेय वहां के म्युनिसपल कार्पोरेशन को जाता है। जिसके सहयोगी के रूप में उनकी कंपनी शहरी कचरे के निस्तारण का काम कर रही है। शहर की साफ सफाई और घरेलू कचरे को उठाने का जिम्मा कार्पोरेशन के हाथ में है तो उससे निकलने वाले कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी ए2जेड ने उठा रखी है। कर्पोरेशन और कंपनी के बीच बेहतर तालमेल का ही नतीजा है कि इंदौर नंबर वन बन सका है।



मित्तल आगे अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताते हैं कि इंदौर के अलावा गुजरात का अहमदाबाद शहर ने भी स्वच्छता सर्वेक्षण में 14वां स्थान हासिल किया है। इस सर्वेक्षण के टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब रहे इंदौर और अहमदाबाद में ए2जेड काम कर रही है। वह कहते हैं कि उनका प्रयास अधिक से अधिक शहरों को साफ बनाने का है, जिसके लिए उन्हें स्थानीय निकायों और प्रदेश सरकारों के सहयोग की दरकार है।

वह बताते हैं कि उनकी कंपनी मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अलावा देश के कई एयरपोर्टस, रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशनों की सफाई का काम कर रही है। हाल ही में दिल्ली के बाहर बने कूड़े के पहाड़ों को हटाने का काम भी ए2जेड को मिला है। इसके अलावा उनकी कंपनी यूरोप के कुछ शहरों में भी सॉलि​ड वेस्ट प्रोजेक्टस पर काम कर रही है।




शहरी कूड़े के निस्तारण में एक दशक का अनुभव रखने वाले मित्तल आगे कहते हैं कि उन्हें एक बात का कष्ट है कि तमाम प्रयासों के बाद भी वह उत्तर प्रदेश के लिए कुछ नहीं कर पाए। 2008 में बड़ी उम्मीदों के साथ उन्होंने यूपी सरकार की मदद से कानपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू किया था। अपने पैतृक शहर कानुपर शहर को गंदगी से मुक्त बनाने के लिए उन्होंने देश का सबसे बड़ा कचरा निस्तारण प्लांट कानपुर में लगाया था। इस प्लांट में कचरे से बिजली बनाने की संयंत्र भी लगाया। उनकी मेहनत उस समय रंग लाई जब 2010—11 में कानपुर को स्वच्छ शहर बनाने के लिए ए2जेड को प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। लेकिन 2012 में उनके प्रयासों को यूपी की राजनीति की ऐसी नजर लगी कि यूपी में कानपुर समेंत उनकी कंपनी को मिले कई शहरों के प्रोजेक्ट लटका दिए गए। कानपुर के चलते हुए प्लांट को ताला लग गया तो जो वाराणसी और मुरादाबाद जैसे प्लांट चालू होने से पहले ही बंद हो गए।

यूपी का केवल वाराणसी बना सका टॉप 50 में जगह—

स्वच्छता सर्वेक्षण में यूपी के हाथ निराशा ही लगी है। देश के सबसे बड़े सूबे के करीब 61 शहरों ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया। जिनमें से केवल वाराणसी टॉप 50 शहरों मेंं शामिल होकर 32वें स्थान पर रहा। जिसके बाद अलीगढ़ को 145वां, झांसी को 166 वां स्थान मिला। राजधानी लखनऊ 269वें स्थान पर रही जबकि यूपी की आॅद्योगिक नगरी कानपुर 175 वें स्थान पर। इसी सर्वेक्षण में अंतिम 434वां स्थान यूपी के गोंडा शहर को मिला है।

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