दलित परिवार ने निमंत्रण कार्ड पर छपवाया भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर

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इलाहाबाद। सहारनपुर में ठाकुरों और दलितों के बीच हुए जातीय हिंसा की गिरफ्त में पूरा प्रदेश है, प्रदेश के अधिकतर ठाकुर या दलित एक दूसरे का विरोध करते दिख रहे है हालांकि सबके विरोध के तरीके में बड़ा फर्क देखने को मिल रहा है। अब नया मामला इलहाबाद के एक दलित परिवार का है जिसने हिन्दू धर्म का बहिष्कार करते हुए एक नई परंपरा का इजात किया है। इस दलित परिवार ने शादी में छपने वाले निमंत्रण कार्ड पर हिन्दू धर्म का बहिष्कार करते हुए कुछ अलग किया है। जैसा की ज्ञातव्य है कि हिन्दू धर्म में शादी के निमंत्रण कार्ड पर भगवान गणेश की फोटो प्रमुख मानी जाती है लेकिन यहां इस दलित परिवार ने अपनी बेटी की शादी का जो निमंत्रण कार्ड छपवाया उसमें सबसे पहले भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर लगाई है। इतना ही नहीं, जो श्लोक लिखा गया है वह भी बुद्धवाणी है।



इलाके में भले यह कार्ड चर्चा का विषय बना हो, लेकिन यह परिवार आश्वस्त है कि उसने जो भी किया है सोच समझ कर किया है। यहां के मेजा तहसील से कुछ दूरी पर स्थित अमौरा गांव के ग्राम प्रधान हिन्चलाल ने यह कार्ड छपवाया है। दरअसल इनकी बेटी खुशबू की शादी गुरुवार को थी इस शादी के लिए जो निमंत्रण कार्ड छपवाया गया था उस पर गणेश जी की जगह भीमराव अम्बेडकर की तस्वीर लगाई गई है। बुद्ध श्लोक भी कार्ड के प्रथम पन्ने पर है।



हिन्चलाल की इस पहल पर पूरा परिवार सहमत है और उन्हें लगता है कि जिसने उनका उत्थान किया वही उनके यहां भगवान का दर्जा पा सकता है। परिजन कहते हैं कि आज समाज में जिनती भी उनकी भागीदारी है वह केवल बाबा साहब की देन हैं। ऐसे में हमारे लिए वह भगवान हैं और उन्हीं की अनुकम्पा से आज हम सर्वसमाज का हिस्सा हैं।



हिन्चलाल पढ़े लिखे हैं और वकालत की डिग्री के साथ गांव के प्रधान भी हैं। हिन्चलाल कहते हैं कि बचपन में उन्हें स्कूल के भीतर जाने की इजाजत नहीं थी। वे संघर्ष कर न केवल खुद स्थापित हुए बल्कि दलित समाज को बराबरी का दर्जा दिलवाया।

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