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जेठमलानी की जेटली पर अभद्र टिप्पणी गंभीर मामला : हाईकोर्ट

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नई दिल्ली: डीडीसीए मानहानि मामले में बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट राम जेठमलानी द्वारा वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को हाईकोर्ट ने गंभीर बताया है। अदालत ने कहा कि यदि केजरीवाल के कहने पर जेठमलानी ने उक्त टिप्पणी की है तो पहले उन्हें कठघरे में आना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह से जिरह जारी रखने का कोई तुक नहीं है। जानकारी हो कि बुधवार को इस मामले में ज्वाइंट रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष जेटली व राम जेठमलानी के बीच अदालत में गरमा गरमी हो थी और बयान दर्ज होने का काम रोकना पड़ा था।




जस्टिस मनमोहन की बेंच के समक्ष जेटली द्वारा यह मामला उठाने पर अदालत ने कहा कि अगर इस तरह की टिप्पणी केजरीवाल के निर्देश पर की गई है तो यह अपमानजनक है। उन्हें (केजरीवाल को) पहले कठघरे में आना चाहिए और जेटली से जिरह से पहले अपने आरोप लगाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे में वादी (जेटली) से जिरह जारी रखने की कोई तुक नहीं है। इस मामले को जेटली की तरफ से सीनियर एडवोकेट राजीव नायर व संदीप सेठी ने अदालत में उठाया और कहा कि इस मामले में केजरीवाल की ओर से यह साफ होना चाहिए कि उक्त टिप्पणी उनके निर्देश पर की गई थी या राम जेठमलानी ने अपने मन से यह टिप्पणियां की।




यह भी कहा गया कि यदि जेठमलानी ने अपने मन से उक्त टिप्पणियां की हैं तो उन्होंने बार काउंसिल आफ इंडिया के रूल का उल्लंघन है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि यदि इस तरह की टिप्पणी किसी रेप केस में बयान दर्ज करने के समय की जाती तो यह एक तरह से पीड़ित के साथ दोबारा रेप के समान होगी। अब इस मामले में एक अन्य बेंच के समक्ष 26 मई को सुनवाई होगी। जानकारी हो कि केजरीवाल व आप के अन्य नेताओं द्वारा डीडीसीए का अध्यक्ष रहने के दौरान जेटली पर वित्तीय अनियमितताएं करने का आरोप लगाया था। जिस पर अरुण जेटली ने मानहानि का वाद दायर कर बतौर हर्जाना दस करोड़ रपए देने की मांग क र रखी है। इसी मामले में बीते दिन ज्वाइंट रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष अरुण जेटली से बयान दर्ज करने के दौरान जेठमलानी ने कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी।

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