कुमार विश्वास की ‘निर्भया’ को विदाई, सुनकर नम हो जाएंगी आंखें

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लखनऊ। आप नेता और कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में कुमार बेहद ही भावुकता पूर्ण एक गीत गुनगुना रहे हैं जिसे सुन शायद हर इन्सान भावुक हो जाये। 5 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के दोषियों पर फांसी की सजा बरकरार रखी। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स बेहद ही खुश दिखे। इसी क्रम में कुमार ने भी निर्भया को विदाई स्वरुप एक गीत समर्पित किया, साथ ही उन्होंने निर्भया से इस गीत में गुहार लगाई है कि मेरे घर आना, मै तुम्हें भरोसा दिलाऊंगा कि ‘मर्द‘ होने से पहले ‘इंसान‘ होता है असली ‘पुरुष‘!




विदा लाडो!
तुम्हे कभी देखा नहीं गुड़िया,
तुमसे कभी मिला नहीं लाडो!
मेरी अपनी दुनिया की अनोखी उलझनों में
और तुम्हारी ख़ुद की थपकियों से गढ़ रही
तुम्हारी अपनी दुनिया की
छोटी-छोटी सी घटत-बढ़त में,
कभी वक़्त लाया ही नहीं हमें आमने-सामने।
फिर ये क्या है कि नामर्द हथेलियों में पिसीं
तुम्हारी घुटी-घटी चीख़ें, मेरी थकी नींदों में
हाहाकार मचाकर मुझे सोने नहीं देतीं?
फिर ये क्या है कि तुम्हारा ‘मैं जीना चाहतीं हूँ माँ‘ का
अनसुना विहाग मेरे अन्दर के पिता को धिक्कारता रहता है?
तुमसे माफी नहीं माँगता चिरैया!
बस, हो सके तो अगले जनम
मेरी बिटिया बन कर मेरे आँगन में हुलसना बच्चे!
विधाता से छीन कर अपना सारा पुरुषार्थ लगा दूंगा
तुम्हें भरोसा दिलाने में कि
‘मर्द‘ होने से पहले ‘इंसान‘ होता है असली ‘पुरुष‘!

https://www.youtube.com/watch?v=wZPxdNgn7-k

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