महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि पर इस शुभमुहूर्त में करें पूजा, शिवजी होंगे प्रसन्न

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नई दिल्ली: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था। तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरां को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं।




उनका रूप बड़ा अजीब है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों ने से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल 24 फरवरी को महाशिवरात्रि है।

विशेष बात यह है कि इस बार महाशिवरात्रि विशेष संयोग में मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि शुक्रवार की है जिस दिन पूरे तीन विशेष योग बने हैं। दो दिन पड़ने वाले महाशिवरात्रि का पर्व इस बार सवार्थ सिद्ध एवं सिद्ध योग पड़ने से खास होगा। चतुर्दशी तिथि 24 फरवरी की रात्रि साढ़े नौ बजे से शुरू होगी, जो 25 फरवरी को रात्रि सवा नौ बजे तक रहेगी। इसलिए दोनों दिनों तक महाशिवरात्रि मानी जाएगी।

क्या है शुभमुहूर्त

25 फरवरी की रात्रि में चतुर्दशी तिथि न होने से 24 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व शास्त्र सम्मत है। महाशिवरात्रि को अर्द्ध रात्रि के समय ब्रह्माजी के अंश से शिवलिंग प्रकट हुआ था, इसलिए रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी का ज्यादा महत्व होता है। इस वर्ष सबसे विशेष बात यह है कि दोनों दिन सिद्ध योग पड़ रहे हैं। 24 फरवरी को सर्वार्थ सिद्ध योग तथा 25 फरवरी को सिद्ध योग पड़ रहा है।

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