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मुआवजा लेने के लिए सपा एमएलसी बुक्कल नवाब ने दस्तावेजों से की छेड़छाड़, फोरेंसिक जांच में हुआ खुलासा

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लखनऊ: एमएलसी मजहर हुसैन उर्फ बुक्कल नवाब की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पिछली सरकार में गलत तरीके से उन्हें नदी की तलहटी की जमीन का मुआवजा दिया गया था। फोरेंसिक जांच में पता चला है कि जमीन का मुवावजा लेने के लिए सपा एमएलसी ने जो राजस्व दस्तावेज पेश किये थे, उनमें हेराफेरी की गई थी। कुछ में ओवरराइटिंग तो कई में टैम्परिंग की गई थी।




विदित हो कि इस मामले में तहसील व राजस्व विभाग से जुड़े जिम्मेदरों की भूमिका की जाँच कर रही कमेटी ने संदेह पर दस्तावेज की फॉरेंसिक जाँच के लिए राजकीय लैब भेजा था। जल्द ही राजस्व परिषद् कोर्ट में जाँच रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस हेराफेरी में बुक्कल नवाब के साथ-साथ शामिल रहे तहसील व जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारीयों व कर्मचारियों पर जल्द ही शिकंजा कसेगा।

वहीं इस मामले में एमएलसी का कहना है कि उनका परिवार पहले से ही बहुत रईस था और उनके दादा के पास कई सैकड़ों बीघे ज़मीन थी जो कि यूपी के हरदोई, लखनऊ, सीतापुर आदि जिलों में फैलीं हुई है। उन्होंने कहा है कि यह जमीन बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ों में डूब जाती थी इसीलिए कभी इनपर क़ब्ज़ा नहीं किया जा सका था। उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट में सभी दस्तावेज़ जमा कर दिए है मामले पर सुनवायी चल रही है।





ग़ौरतलब है कि नवाब के ऊपर इस बात का आरोप है इन्होंने अवैध रूप से ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके सरकार से 8 करोंड रुपए वसूले है। यह भी बता देते है कि नवाब के ख़िलाफ़ मुकदम भी दर्ज करवाया गया है। इतना ही नहीं नवाब को धन वापस करने के लिए नोटिस भी दी जा चुकी है। आज प्रेस कॉन्फ़्रेन्स के दौरान नवाब ने कहा है कि मुझे सरकार से अभी 30 करोड़ रुपए और मिलने है, जिस दिन मुझे वह पैसे मिल जाएँगे मैं राम मंदिर के निर्माण में 15 करोड़ रुपए दान स्वरूप दे दूँगा।

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