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नगर निगम में मचा हड़कंप, तेल चोरी मामले में फिर खुली कार्रवाई की फ़ाइल

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लखनऊ। नगर निगम में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई, की फाइल दबाने का खेल चल रहा था। नाम परिवर्तन में गड़बड़ी करने वाले दो लिपिकों पर कार्रवाई के बजाय फाइल को दबाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था तो एक और मामले ने नगर निगम के अफसरों की कारस्तानी से परदा उठा दिया। कूड़ा उठाने वाले वाहनों का माइलेज कम दिखाकर तेल चोरी करने का मामला अब खुल गया है।




नगर निगम में कई करोड़ के इस खेल की जांच सतर्कता विभाग ने की थी और फोर मैन दिनेश कुमार समेत कई को दोषी पाया था। इस मामले में शिकायत मिलने के बाद शासन के निर्देश पर नगर आयुक्त ने फाइल मंगवाकर कार्रवाई की कवायद शुरू कर दी है। 40 छोटी गाड़ियों का माइलेज कम दिखाकर चार साल तक की गई तेल चोरी 2013 में विजिलेंस जांच में खुली थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी फाइल दबाए रहे। इस मामले में तत्कालीन एक्सईएन, फोरमैन और ड्राइवरों की मिलीभगत उजागर हुई थी।

दरअसल, यह मामला इसलिए उठा है, क्योंकि फोरमैन दिनेश कुमार 15 दिन सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। डीजल चोरी का यह मामला 2008 से 2012 के बीच का है। सतर्कता टीम की जांच में पाया गया था नए वाहनों का माइलेज 15 किमी के बजाय 12 किमी का दिखाकर डीजल की चोरी कर नगर निगम को चूना लगाया गया था। इस मामले में अभियंताओं के साथ ही नगर निगम की आरआर वर्कशाप के पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। शासन ने इस गड़बड़ी मामले में 14 मई 2015 को सतर्कता टीम से जांच कराने के आदेश दिए थे।




जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगर विकास सचिव एसपी सिंह ने नगर निगम के आरआर में तैनात तत्कालीन सहायक अभियंता अजय राम के अलावा अधिशासी अभियंता राजीव वाजपेयी को भी प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के आदेश दिए थे। इसके अलावा फोरमैन दिनेश कुमार के खिलाफ नगर निगम को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के अलावा नौकरी के अभिलेखों में जन्मतिथि की गलत जानकारी देने पर धारा 409, 420, 467, 468, 471 के अलावा 13 (1) डी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। 31 अगस्त का यह आदेश नगर निगम में दबा लिया गया था। इसके बाद चार माह पूर्व नगर आयुक्त ने भी पत्रवली तलब कर कार्रवाई को कहा था, लेकिन फिर फाइल को दबा दिया गया था।

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