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नसीमुद्दीन ब्लैकमेलर है, पार्टी के लोगों से उगाही करता रहा : मायावती

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लखनऊ। मायावती ने कभी अपने करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के लगाए आरोपों पर जबाव देते हुए कहा कि नसीमुद्दीन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य सीटों की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें जानकारी मिली थी कि नसीमुद्दीन ने पार्टी के पदाधिकारियों और प्रत्याशियों की बातें रिकार्ड कर लोगों को ब्लैकमेल कर उनसे पैसे एंठे। उन्होंने पार्टी के पदाधिकारियों और प्रत्याशियों को ऐसी ही रिकार्डिंग सुनाकर पद से हटवाने और टिकट कटवाने का डर दिखाया।



मायावती ने नसीमुद्दीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की बातें रिकार्ड कर लेता हो वह किसी को भी ब्लैकमेल करता सकता है। उसने ब्लैकमेलिंग का धंधा फैला रखा था। उसने इसी तरह से पार्टी के कई समर्पित नेताओं को पार्टी से बाहर करवा दिया।




इसके साथ ही मायावती ने 50 करोड़ की डिमांड पर जवाब देते हुए कहा कि चुनावों के दौरान ​नसीमुद्दीन और उनके द्वारा बनाए गए पार्टी के प्रत्याशी बड़ी मात्रा में पार्टी सदस्यता की किताबें ले गए थे। कुछ ने तो पैसे दे दिए, कुछ ने न तो पैसे दिए और न किताबें लौटाई। जिसके लिए नसीमुद्दीन से कहा गया था।

नसीमुद्दीन पर दबाव डालने का उद्देश्य इतना भर था कि जो लोग न तो सदस्यता राशि जमा करवा रहे थे और न ही किताबें वापस कर रहे थे उनसे हिसाब लेने के लिए कहा गया था। क्योंकि जो लोग चुनाव जीत गए उनसे तो पैसे मिल जाते हैं लेकिन जो चुनाव हार जाते हैं वे पार्टी के फंड को खा जाते हैं।



अपनी सफाई दे रही मायावती ने नोटबंदी के समय की याद दिलवाते हुए कहा​ कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी पार्टी की सदस्यता रसीदों से आने वाली रकम ही पार्टी के खाते में जमा करवाई गई थी। जिसे बीजेपी ने चुनावी मुद्दा भी बनाया था। यह एक बड़ी रकम होती है जिससे पार्टी अपने खर्चे चलाती है। पार्टी पहली बार निकाय चुनावों में उतरने वाली है जिसके लिए पार्टी को फंड की जरूरत पड़ेगी इसी बात को ध्यान में रखते हुए नसीमुद्दीन पर दवाब बनाया जा रहा था।

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