मोदी सरकार में बने सबसे ज़्यादा मुस्लिम ‘आईएएस’

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नई दिल्ली। इस साल देश के मुसलमानों ने वह कीर्तिमान हासिल किया है जो आज़ादी के बाद अभी तक नहीं हुआ था। दरअसल देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (IAS) में इस साल सबसे ज़्यादा मुसलमान उम्मीदवार चयनित हुए है जो कि अपने आप में एक मिसाल है। यह आकडेन यह बताने के लिए काफी है कि देश के मुस्लिम देश की सेवा के क्षेत्र में प्रयासरत है।



एक सर्वे रिपोर्ट की माने तो इस साल यह परीक्षा पास करने वाले कुल 1099 उम्मीदवारों में से क़रीब 50 मुसलमान हैं। ये संख्या आज़ादी के बाद से सबसे ज़्यादा है। बीते साल सिविल सेवा परीक्षा में कुल 1078 उम्मीदवारों का चयन हुआ था जिनमें से 37 मुसलमान थे। इस साल शीर्ष 100 उम्मीदवारों में से से 10 मुसलमान हैं जबकि बीते साल सिर्फ़ एक मुसलमान उम्मीदवार ही शीर्ष 100 में जगह बना पाया था। यही नहीं जम्मू-कश्मीर से भी इस बार कुल 14 लोग सिविल सेवा के लिए चुने गए हैं जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।



2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भारत में मुसलमानों की कुल आबादी 14.23 प्रतिशत है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सरकारी नौकरियों में मुसलमानों का प्रतिशत 8.57 है जबकि प्राइवेट नौकरियों का आंकड़ा नहीं रखा जाता है। ऐसे में भले ही इस साल सिविल सेवा में मुसलमानों की कामयाबी को उम्मीद की किरण के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन बराबरी तक पहुंचने में अभी मुसलमानों को लंबा फ़ासला तय करना है।

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