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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सहारा ने फिर छापा नया विज्ञापन, सेबी निशाने पर



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Published on: Sat, 20 Jul 2013 at 07:46 IST
लखनऊ| सहारा, सुप्रीम कोर्ट और सेबी आजकल देश की मीडिया में इन तीन संस्थाओं की ख़बरों को पाने की होड़ लगी है। सहारा और सेबी की लड़ाई किसी से छुपी नहीं है, ऊपर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहारा को दायरे के अन्दर रहकर काम करने की हिदायत और सख्ती के बावजूद सहारा समूह अभी भी अपने को पाक साफ़ साबित करने पर लगा हुआ है।

सहारा समूह आये दिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन और सेबी द्वारा चलाये जा रहे चाबुक को लेकर देश के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन देकर अपने को सही साबित करने की कोशिश में भी है। सहारा ने सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा के 16 जुलाई को दिए गए एक बयान को लेकर देश के प्रमुख अखबारों में एक बड़ा विज्ञापन छपवाया।

इस विज्ञापन में सहारा ने जिन शब्दों का प्रयोग किया उससे सेबी और सहारा की अदावत का साफ़ पता चलता है। सहारा ने अपने इस विज्ञापन में लिखा है "सेबी के चेयरमैन ने हाल में सहारा के OFCD मामले शरारतपूर्ण ढंग से सभी को गुमराह किया है। शुरुवात से ही सेबी का एक सूत्रीय कार्यक्रम रहा है कि किसी भी ट्रायल के माध्यम से शरारत पूर्ण ढंग से भ्रामक जानकारियां देकर सहारा को क्षति पहुंचाई जाये और उसे ख़त्म कर दिया जाये"।

सहारा का विज्ञापन आज देश के सभी अग्रणी अखबारों में छपा, सहारा ने अपनी बात रखने के लिए एक लिंक भी दिया जिसमें सहारा खुद को पाक साफ़ बताते हुये ये कहती है की उसने जो भी किया कंपनी एक्ट के मुताबिक किया। सहारा के लिंक में दिए गए नोट के अंश जैसे उसमें लिखे गए है,

"Registrar of companies under Ministry of Company Affairs officially and lawfully had allowed the unlisted companies Sahara India Real Estate Corporation Limited (SIRECL) and Sahara Housing Investment Corporation Limited (SHICL) to issue Optionally Fully Convertible Debentures, based on our Red Herring Prospectus fully complying with the provisions of Companies Act 1956 (the Act) keeping in view the latest provisions of first proviso to Sec.67(3) of the Act"

सहारा के इस विज्ञापन से पहले भी सहारा ने सहारा इंडिया परिवार तथा सुब्रत राय सहारा द्वारा दिनांक 17 मार्च 2013 को प्रमुख समाचारपत्रों में प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन को छाप कर अपनी बात रखने की कोशिश की थी। तब हाई कोर्ट ने इस मामले में सहारा को फटकार लागते हुये कहा था कि प्रमुख समाचारपत्रों में प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन को विधि-विरुद्ध बताती जनहित याचिका संख्या 2593/2013 में सहारा इंडिया तथा सुब्रता राय सहारा को नोटिस जारी किया है| नोटिस डाक और दस्ती (बाई हैंड) दोनों रूप में जारी की गयी है| जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस डॉ सतीश चंद्रा की बेंच ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया था।

सेबी के निदेशक यू के सिन्हा ने कहा क्या था

यू के सिन्हा सहारा समूह का नाम लिए बगैर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक बड़ी कंपनी तीन करोड़ निवेशकों से 4 से 5 अरब डॉलर की पूंजी जुटाती है और फिर दावा करती है कि उसने तो यह राशि प्रतिभूतियों को निजी स्तर पर आवंटित कर के जुटाई है। सिन्हा ने कहा कि जब भी निवेशकों के हितों की रक्षा या फिर अवैध योजना के जरिए जनता से धन जुटाने का मामला सामने आता है तो लोगों के दिमाग में जो सबसे पहले नियामक एजेंसी के तौर पर सेबी का ध्यान आता है।

सिन्हा ने सहारा समूह का नाम लिए बिना, 'एक बड़े कंपनी समूह का उदाहरण दिया, जिसने 3 करोड़ से अधिक निवेशकों से 4 से 5 अरब डॉलर जुटाए। 'इसके बाद कंपनी दावा करती है कि यह राशि उसने प्राइवेट प्लेसमेंट के रास्ते जुटाई है। सवाल है कि प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए कैसे 3 करोड़ लोगों तक पहुंचा जा सकता है।

सेबी इस समय सहारा समूह के साथ एक लंबे मामले में उलझी हुई है जिसमें सहारा समूह की दो कंपनियों द्वारा बॉन्ड जारी कर तीन करोड़ से अधिक निवेशकों से जुटाई गई 24,000 करोड़ रुपये की राशि को वापस किया जाना है।

क्या था पूरा मामला जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी खड़े किये सवाल

सहारा इंडिया रियल इस्टेट कारपोरेशन एंड सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन के डिबेंचर के माध्यम से सहारा इंडिया कंपनी द्वारा आम लोगों से 27 हज़ार करोड़ रुपये जमा कराने के मामले में, सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सहारा इंडिया कंपनी से स्पष्ठ तौर पर पूछा था कि क्या वो उन लोंगों के पैसे एक हफ्ते में वापस कर देंगे जिनसे उन्होंने नियमो के विरुद्ध जाकर पैसे जमा किये है।

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया द्वारा देश के नामी अखबारों में दिए गए विज्ञापनों पर नाराजगी जाहिर की थी, जिसमे सहारा इंडिया ने गैरकानूनी ढंग से जमा कराये गए 24 हज़ार करोड़ रुपयों को उचित ठहराने की कोशिश की गई थी। विज्ञापन में सेबी को भी सहारा ने निशाना बनाते हुए गलत बताया था। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में सहारा को अपना पक्ष और स्थिति स्पष्ठ करने का आदेश दिया था।

तात्कालिक मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर के अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सहारा द्वारा संचालित दोनों कंपनियों से पूछा है कि क्या वो 4 दिसंबर 2012 तक वो बता सकेंगे कि वो निवेशको का सारा पैसा एक हफ्ते में वापस कर देने की स्थित में है या नहीं ?

तात्कालिक मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को लागु ना करने पर सहारा इंडिया को फटकार लगते हुए कहा की इस मामले में कंपनी की कोई सुनवाई नहीं हो सकती है और कंपनी द्वारा दी जा रही दलीलों को नहीं माना जा सकता है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने कहा कि सहारा का रवैया काफी गैरजिम्मेदारना है और हम सहारा के मर्जी के अनुरूप सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या नहीं कर सकते।

सहारा ग्रुप अपने द्वारा गलत ढंग से जमा किये गए पैसे को उचित ठहराना चाहता है, सहारा इंडिया कंपनी के पैरोकार वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने सहारा द्वारा निवेशको से लिया गया पैसा वापस न कर पाने को उचित ठहराने की कोशिश की इस पर कोर्ट ने कहा आप अपने द्वारा किये जा रहे अनुचित व्यवहार को उचित ठहराने की कोशिश कर रहे है| सुप्रीम कोर्ट में जब इस मुद्दे पर जोरदार बहस चल रही थी तभी सहारा इंडिया कंपनी की ओर से पैरोकारी कर रहे दुसरे वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कुछ कहना चाहा जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर आप मुकदमा हार रहे है, तो आप को अनावश्यक बहस करने कि जरुरत नहीं आप अपनी जगह पर बैठ जाए |

सेबी ने भी सहारा द्वारा दाखिल याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सहारा के विरुद्ध पहले ही अवमानना की याचिका दाखिल की जा चुकी है, इसलिए सहारा को कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए इस पर मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर के अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि उनकी चिंता आम आदमी द्वारा जमा कराये गए पैसे को वापस करने की है, जबकि अवमानना मामले में उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है ।

बहरहाल अब इस नए विज्ञापन ने एक बार फिर सहारा, सेबी और सुप्रीम कोर्ट को आमने सामने कर दिया है| सहारा इंडिया इस विज्ञापन के माध्यम से अपने द्वारा जमा कराये जाने वाले पैसे को सही साबित करने पर लगी है, वही इस पुरे मामले में पिस रहा है वो आम आदमी जिसका पैसा सहारा ने अपनी योजनाओं में जमा कराया है।

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