सी-ऐंड-डीएस के अफसरों की लापरवाही से लगा 200 की जगह 30 तन का कम्पोस्ट प्लांट

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लखनऊ: आधी- अधूरी तैयारियों के साथ चल रहा शिवरी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में एक और गड़बड़ी सामने आई है। शिवरी में बना जैविक खाद प्लांट तय क्षमता के मुकाबले 15 % ही काम कर रहा है। एग्रीमेंट की शर्तों के तहत, शिवरी में 200 टन प्रति दिन की क्षमता का कम्पोस्ट प्लांट लगाया जाना था। अनुमान के तहत, यहां रोजाना आने वाले कूड़े से 20% से 25% यानी 250 से 300 टन कम्पोस्ट रोजाना बनाया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, कम्पोस्ट की मात्रा अधिक होने पर ऐसा ही एक और प्लांट लगाया जाना था, लेकिन सी-ऐंड-डीएस के अफसरों की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ। इसकी शिकायत काम कर रही जांच एजेंसी ईकोग्रीन एनर्जी ने नगर आयुक्त से की है।




नगर आयुक्त को जो काम कर रही एजेंसी ने शिकायत की उसमें साफ़ कहा गया है कि कम्पोस्ट प्लांट की क्षमता महज 30 टन प्रति दिन है। मशीन को पूरे दिन चलाने पर भी इससे अधिक कम्पोस्ट नहीं बन पा रहा। इस कारण प्लांट में कम्पोस्ट के लिए रॉ-मटीरियल इकट्ठा होता जा रहा है। कंपनी के जीएम नीतेश तिवारी ने बताया कि इसके लिए अलग से बैलेस्टिक सेपरेटर मंगवाने की जरूरत पड़ेगगी, तब हर घंटे 30 टन कम्पोस्ट बन सकेगा, हालांकि एजेंसी पर आर्थिक दबाव भी पड़ेगा। फिलहाल इस मामले में नगर आयुक्त उदयराज सिंह का कहना है कि वह सी-ऐंड-डीएस को पत्र लिखकर जवाब मांगेंगे। वह इसकी तकनीकी जांच कर जवाब दें। अगर गड़बड़ी है तो पुरानी एजेंसी ज्योति एन्वायरोटेक से रिकवरी होगी।




मोहान रोड के शिवरी ग्राम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सौ करोड़ रुपए की लागत से प्लांट लगाया गया था, जिसका उददेश्य कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना था, लेकिन सरकारी हीलाहवाली के चलते इसमें आयेदिन दिक्कतें लगी रहती हैं। यह तो रहा राजधानी लखनऊ का हाल। सूबे के हर बड़े शहर में जहां भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगे हुए हैं। उन हर जगह का भी यही हाल है। यदि जांच की जाए तो घोटाले सामने आ सकते हैं।

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