सौन्दर्य प्रसाधन का करती हैं इस्तेमाल तो जरूर पढ़ लें यह खबर

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लखनऊ: रसायनयुक्त सौन्दर्य प्रसाधनों से पेट के अल्सर व किडनी प्रभावित होने से लेकर फेफड़े का कैंसर तक हो सकता है।यह बात शुक्रवार को आंचलिक विज्ञान नगरी में ‘‘नो योर हर्ब’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में सीमैप के पूर्व वैज्ञानिक डा. आनन्द अखिला ने कही। उन्होंने सौन्दर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल किये जाने वाले खतरनाक व स्वास्य के लिए हानिकारक रसानयों के बारे में गृहणियों को जानकारी दी। साथ ही घर में फलों और सब्जियों से त्वचा चमकाने वाले फेस पैक के बारे में बताया।





उन्होंने बताया कि बाजारों में बिक रहे रसायनयुक्त प्रसाधनों से कई रोग हो रहे हैं। लिपस्टिक में मिथाइल पेराबेन, प्रोपल पेराबेन, लेड, क्रोमियम, मैंगनीज और एल्युमिनियम के योगिक प्रयोग में लाये जाते हैं। प्राय: इसकी मात्रा मानकों से अधिक पायी जाती है। पेट में जाने पर इनसे फेफड़े का कैंसर, पेट का अल्सर व किडनी प्रभावित हो सकती है। इसी प्रकार फेयरनेस क्रीम में मरकरी यानि पारे के यौगिक व ब्लीचिंग एजेन्ट मिलाया जाता है, जो त्वचा को कमजोर और संवेदनशील बना देते हैं। हेयर डाई में आरोमयिक अमीन्स का प्रयोग हाड्रोजन पराक्साइड की उपस्थिति में किया जाता है, जिससे अलग-अलग हेयर डाई के रंग बनते हैं।



यह रक्त में जाने की स्थिति में हीमोग्लोबिन से जुड़ करके बीमारियां पैदा करते हैं। इसी प्रकार शैम्पू, नेल पालिश, हेयर रीमूवर्स क्रीम में भी घातक रसायनोंका इस्तेमाल किया जाता है।इस अवसर पर उन्होंने नीम, हल्दी, एलोवेरा,तरबूज, पपीते और खीरे के साथ दही, मुल्तानी मिट्टी और शहद के अलग-अलग मिशण्रके साथ फेस पैक बनाना सिखाया। उन्होंने अरोमाथेरेपी द्वारा तनाव से मुक्ति, जुकाम-बुखार, गले की खराश से मुक्ति, सिर दर्द, बदन दर्द से आराम पाने वाले रसायनों व प्राकृतिक तरीकों के बारे में भी बताया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सिगरेट, पान, मसाला, सिंथेटिक रंग वाली मिठाइयों व सिंथेटिक सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग धीरे-धीरे कम कर देने से स्वास्य बिगाड़ने वाले रिस्क फैक्टर को कम किया जा सकता है।

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