शुरू हुआ खुदा के करीब लाने वाला रमजान का पाक महीना

लखनऊ। रमजान के पाक महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक 9वें महीने रमजान होता है। इस महीने की शुरुआत नए चांद के साथ होती है और 29-30 दिन के बाद इस पवित्र महीने का अंत भी एक नए चांद के साथ होता है। रमजान के खत्म होने के अगले ही दिन मुस्लिमों का सबसे खास त्योहार ईद उल फितर मनाया जाता है।

रमजान के महीने में मुस्लिम धर्म के लोग रोजा रखते हैं और रोजा के कई शख्त नियम भी होते हैं। 30 दिन के रोजा में सुबह सूरज उगने से लेकर सूरज अस्त होने तक न कुछ खाया जाता है न ही पानी पिया जाता है।

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जानिए रोजा और रमजान से जुड़ी कुछ खास बातें

अगर आप रमजान के महीने में रमजान के रोजे के अलावा किसी और रोजे की नियत करेंगे तो वो रोजा कुबूल नहीं होगा और ना ही वो रमजान के रोजे में माना जाएगा।
आप रमजान महीना शुरु होने से पहले ही पूरे महीने की जरूरत का सामान खरीद लें जिससे आपको रोजे की हालत में बाहर ना भटकना पड़े और आप ज्‍यादा से ज्‍यादा वक्‍त इबादत में दे सकें।
सहरी में ज्‍यादा तला हुआ, मसालेदार, मीठा खाना न खाएं क्योंकि ये सब खाने से प्‍यास ज्‍यादा लगती है। सहरी के वक्त ओटमील, दूध, ब्रेड और फल सेहत के लिए बेहतर रहता है।
रमजान के महीने में ज्‍यादा से ज्‍यादा इबादत करें, अल्‍लाह को राजी करना चाहिए क्‍यूंकि इस महीने में कर नेक काम का सवाब बढ़ा दिया जाता है।
रमजान में ज्‍यादा से ज्‍यादा कुरान की तिलावत, नमाज की पाबंदी, जकात, सदाक और अल्‍लाह का जिक्र करके इबादत करें।
रोजेदारों को इफ्तार कराना बहुत ही सवाब का काम माना गया है।
अगर कोई शख्‍स सहरी के वक्‍त रोजे की नियत करे और फिर सो जाए उसके बाद नींद मगरिब के बाद खुले तो उसका रोजा माना जाएगा।
अगर आपके दांत में खाना फंसा है और आपने जानबूझ कर निगल लिआ तो रोजा नहीं माना जाएगा।
मुंह का पानी निगलने से रोजा नहीं टूटता लेकिन अगर किसी लजीज खाने की ख्‍वाहिश से मुंह में पानी आ जाए तो उस पानी को निगलने से रोजा टूट जाता है।
रमजान के महीने में नेकियों का सवाब 10 से 700 गुणा तक बढ़ा दिया जाता है। नफ्ल नमाज का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 फर्ज के बराबर हो जाता है।
रमजान में अपनी तमाम बुरी आदतों को छोड़ दें और इस बा-बरकत महीने का इस्‍तेमाल नेक कामों में करें। रमजान में अपने पड़ोसियों को हमेशा याद रखें और उनका ध्यान भी रखें।

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