धोनी

धोनी के वो फैसले जिन्हें लेने की हिम्मत कोई कप्तान नहीं करता

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नई दिल्ली: 2017 की शुरूआत के साथ भारतीय क्रिकेट के सबसे सफलतम कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने क्रिकेट के सारे प्ररूपों की कप्तानी को अलविदा कह सबको चौका दिया है। धोनी का नाम भारत ही नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट के सफलतम कप्तानों में आता है। धोनी ने अपनी कप्तानी के दम पर टीम इंडिया को विश्व क्रिकेट में एक नए मुकाम तक पहुंचाया है। बतौर कप्तान उनकी शैली में कुछ बातें ऐसी थी जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर करतीं हैं।




आइये जानते है धोनी के कुछ ऐसे फैसले जिनके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में उन्हे बतौर कप्तान हमेशा याद किया जाएगा।

टी20 विश्वकप फाइनल में जोगिंदर शर्मा को आखिरी ओवर

साल 2007 में वर्ल्डकप टी-20 के फाइनल मैच का वह आखरी ओवर भला कौन भूल सकता है, जिसमे धोनी ने अपने प्रयोग की वजह से भारत को पहले वर्ल्ड टी20 चैंपियन का तगमा दे दिया। कप्तान धोनी ने जब जोगिंदर शर्मा को फाइनल मुकाबले के आखिरी ओवर में गेंद सौंपी तो दर्शकों समेंत कई विशेषज्ञों तक ने उनके फैसले पर हैरानी जताई थी। यह हैरान करने वाला फैसला इसलिए था क्योकि धोनी के पास आरपी सिंह, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह जैसे अनुभवी गेंदबाज़ विकल्प के रूप में मौजूद थे, इसके बावजूद उन्होने अपने मन की सुनी और जोगिंदर के हाथों में गेंद थमा दी। जोगिंदर ने भी कप्तान की उम्मीदों को पूरा करते हुए बेहतरीन गेंदबाज़ी कर आखिरी ओवर में मिसबाह का अहम विकेट झटक 3 गेंदे बाकी रहते भारतीय टीम को जीत दिला दी। जिसके बाद कप्तान धोनी के इस प्रयोग की वर्ल्ड क्रिकेट में जमकर तारीफ हुई।




2011 विश्वकप में युवराज से पहले मैदान पर आना

साल 2011 का लम्हा हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के जहन में आज भी ताजा होगा जब भारतीय टीम ने 28 साल बाद क्रिकेट विश्वकप जीता था। फाइनल मुकाबले में एक वक्त ऐसा भी आया जब लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय पारी लड़खड़ाने लगी। टीम इंडिया ने सलामी बल्लेबाज सहवाग, सचिन के बाद विराट कोहली जैसा अहम विकेट 114 रनों के योग पर गंवा दिए थे। पूरे टूर्नामेन्ट की तरह सभी को उम्मीद थी कि पांचवे खिलाड़ी के रूप में युवराज सिंह बल्लेबाज़ी करने आएंगे, लेकिन धोनी ने प्रयोग करते हुए युवराज की जगह स्वयं उतर कर विरोधी टीम श्रीलंका की रणनीति पर पानी फेर दिया। उन्होंने चौथे विकेट के लिए गौतम गंभीर के साथ 109 रनों की साझेदारी करते हुए मुकाबले को श्रीलंकाई खिलाडियों के पंजे से खींच लिया और परिणाम स्वरूप भारतीय टीम विश्व विजेता बनी।





वनडे-टी20 की कप्तानी का त्याग —

टी20 में विश्वकप, 50 ओवर के क्रिकेट में विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया चैंपियन। ये सब खिताब भारतीय टीम को कप्तान एमएस धोनी की कप्तानी के बदलौत ही मिले हैं। धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने ये तीनों ट्रॉफी बतौर कप्तान अपने नाम की हो लेकिन 4 जनवरी की रात उन्होंने अचानक वनडे और टी20 में कप्तानी छोड़ने का एलान कर दिया। ये फैसला इतना अचानक हुआ जिसकी किसी को भनक भी नहीं लगी।

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