वाह सरकार, बजट 10 हजार करोड़ का खर्च हुआ 8 प्रतिशत

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लखनऊ। सत्ता हाथ आने के बाद वादे और दावे किस अंजाम तक पहुंचते हैं इसका खुलासा शुक्रवार को सामने आई यूपी सरकार की कैग रिपोर्ट में हुआ है। सरकारी खर्चों की समीक्षा करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) यानी कैग ने 2015-16 के बजट पर पेश की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यूपी सरकार ने अपने विभिन्न विभागों के करीब 227 कार्यों और योजनाओं को पूरा करने ​के लिए 10,076 करोड़ का प्रावधान किया था। जिसमें से यूपी सरकार केवल 8 प्रतिशत बजट ही खर्च कर पाई शेष सरेंडर कर दिया गया।




यह जानकर अश्चर्य होता है कि जो सरकारें तमाम योजनाओं के लिए बजट की कमी को लेकर मूड़ फुटौब्बल पर आमादा रहतीं हैं उन्हें ये सब नजर क्यों नहीं आता। या फिर दूसरे शब्दों में राजनीति हाथ नहीं केवल जुबान चलाते हैं।



कैग की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यूपी सरकार ने जिन 227 योजनओं के लिए 10,076 करोड़ का प्रवधान अपने बजट में किया था। उनमें से 4941 करोड़ के प्रवधान वाली 95 योजनाओं पर सरकार फूटी कौड़ी खर्च नहीं कर पाई। पूरी रकम में से 9,245 करोड़ रुपए सरेंडर कर दिए गए।


मूल बजट खाते में रहते जारी कर दिया अनुपूरक अनुदान—

सरकारें अपने मुख्य वार्षिक बजट की समीक्षा के आधार पर अनुपूरक बजट जारी करतीं है। जिसमें सरकार अलग-अलग विभाग की लंबित योजनाओं की आवश्यकता को देखते हुए बजट का पुनरावलोकन करती है। विभाग की किसी योजना के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होती है तो उसे अनुदान दिया जाता है या फिर पुर्नविनियोग प्रक्रिया के तहत उसी विभाग की कम खर्च वाली योजना की शेष राशि का एक हिस्सा अाधिक खर्च वाली योजना को स्थानां​तरित कर दिया जाता है।



कैग की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2015-16 के दौरान बड़े स्तर अनुदान और पुर्नविनियोग किया गया। अधिकांश में इसका कोई औचित्य समझ में नहीं आता क्योंकि कुछ योजनाओं में यह जरूरत से कम था तो कुछ में बहुत ज्यादा।

अफसरों को नहीं बजट प्रबंधन की काबलियत —

कैग ने बजट प्रबंधन को लेकर यूपी की नौकरशाही की काबलियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैग 227 योनाओं को आवंटित बजट और वित्तीय वर्ष के अंत में सामने आए परिणामों के आधार पर ऐसा कहा जा सकता है। अफर ने जिस तरह से 10 हजार करोड़ के बजट प्रावधान के बाद योजनाओं को 10 प्रतिशत तक पूरा नहीं कर पाए यह साबित करता है कि अफर अपनी जिम्मेदारियों के प्रति न तो गंभीर है और ना ही अपनी गलतियों को सुधारने में रुचि लेते हैं।

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