यौन शोषण कानून पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली: निर्भया कांड के बाद यौन शोषण कानून (धारा 354 ए) में किए गए बदलाव को अस्पष्ट व उसके दुरुपयोग की आशंका बताने वाली एक याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में उक्त कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल व जस्टिस सी हरी शंकर की बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता दिव्यदीप चतुव्रेदी की तरफ से कहा गया कि धारा 354 ए के प्रावधानों को खत्म किया जाना चाहिए।




वकील चतुव्रेदी ने कहा कि इसमें यह प्रावधान भी शामिल है कि अश्लील टिप्पणी करने वाला व्यक्ति यौन शोषण का दोषी होगा। बेंच से कहा गया कि यह प्रावधान बहुत साफ नहीं है और सामान्य बुद्धि वाले व्यक्ति के लिए यह जानना कठिन है कि क्या निषेध है जिससे वह उसके अनुसार व्यवहार कर सके। उक्त धारा को असंवैधानिक ,मनमानी व अनुचित बताते हुए कहा गया कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष बराबरी) और अनुच्छेद 21 (जीवन और निजी स्वतंत्रता की रक्षा) का उल्लंघन करता है।




यह भी दलील दी गई कि इस प्रावधान में पीड़ित के लिंग को स्पष्ट नहीं किया गया केवल दोषी के लिंग को स्पष्ट किया गया है जो अनुचित है। कानून के अनुसार दोषी का लिंग पुरु ष बताया गया है जबकि पीड़ित के लिंग के बारे में स्पष्ट नहीं किया गया। जानकारी हो कि 16 दिसम्बर 2012 को 23 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद पूर्व प्रधान न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में गठित समिति ने यौन अपराधों से सख्ती से निपटने के लिए आपराधिक कानून में संशोधन का सुझाव दिया था। बेंच ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 अगस्त की तारीख तय की है।

Loading...