योगी आदित्यनाथ

कर्मयोद्धा है योगी आदित्यनाथ, जानिए क्या कहते हैं उनके सितारे

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लखनऊ: राजनैतिक दृष्टिकोण से बेहद सावधान रहने वाले उत्तर प्रदेश को आखिर हिन्दुत्ववादी छवि के नये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिल ही गये बेहद शिक्षित योगी मुखर वक्ता होने के साथ-साथ पूर्वान्च्ल की राजनीति के फायर ब्रान्ड नेता के रुप में जाने जाते हैं। भारी बहुमत के साथ योगी जी से जन आपेक्षायें भी बहुत हैं। सूबे मे समस्यायें भी अधिक हैं। सबसे कम उम्र का सांसद बनने का भी योगी जी का रिकार्ड है। पन्द्रह वर्षाें के बाद सत्ता मे वापसी कर रही भाजपा को भी योगी से काफी उम्मीदे हैं। जन आपेक्षायें भी सीमा रेखा पार कर रही हैं। जनता ने सत्ता की चाभी सौपने के साथ जिम्मेदारी का पहाड़ भी खड़ा कर रखा है। वक्त के साथ अपने आप को ढाल लेने में माहिर योगी आदित्यनाथ के जन्मांक का विश्लेषण करने पर कई तरह की विशेषतायें उभरकर सामने आती हैं।




पौड़ी जनपद मे जन्मे योगी आदित्य नाथ उच्च शिक्षित है अति धार्मिक भी है। श्री योगी जी का जन्म लग्न सिंह है सिंह लग्न मे जन्मे व्यक्तियों के बारे में मानसागरी मे निम्न कथन है। सिंहलग्ने समुत्पन्ने भोगी शत्रु विमर्दकः। स्वल्पोदरोडल्पपुत्रश्च सोत्साही रण विक्रमी।। सिंह लग्न में जन्म के कारण ही योगी जी विपरीत परिस्थितियों मे काम करने वाले, निडर उत्साही स्वभाव वाले, हार जीत के विषय में सदैव जीत का मार्ग प्रसस्त करने वाले हैं। अर्थात् यह भी कह सकते हैं कि योगी जी भाग्यशाली होने के साथ-साथ कर्मयोद्धा भी है।

क्या कहते हैं सितारेः-

योगी के जन्मांक एवं नवमांश पर गौर करें तो महर्षि परासर सिद्धान्त के आधार पर केन्द्र त्रिकोण राजयोग लागू होता है। बुधादित्ययोग भी है। एकादश स्थान में शुक्र, मंगल की युती लाभ ही लाभ देती प्रतीत होती है। स्वग्रही बृहस्पति त्रिकोण मे है। यह भाग्य वृद्धि के साथ-साथ समस्त त्रिकोणों को बेहद ताकतवर बनाता है। यही मुख्य वजह है कि योगी शिक्षा तथा धर्म कार्याें मे किसी न किसी रुप में सदैव जुड़े रहेंगे।

आने वाला कलः-




जन्मांक तथा नवमांश के सितारे योगी को दृढ़प्रतिज्ञ बनाते हैं। वर्तमान समय में योगी जी की विन्शोत्तरी महादशा मे केतु मे केतु का अन्तर 18.07.2017 तक है। उपरान्त केतु की महादशा मे शुक्र का अन्तर प्रारम्भ हो जायेगा। यह अन्तर 18 सितम्बर 2018 तक चलेगा। केतु की अन्तरदशा का प्रारम्भ कठिनाइयों भरा प्रतीत होगा उपरान्त की सभी अन्तरदशायें योगी जी के लिये संजीवनी का काम करेंगी। निष्कर्ष यह निकलता है कि योगी जी कठिन से कठिन स्थितियों में भी मार्ग प्रसस्त कर लेंगे तथा अपनी कठोर शैली के कारण जनमानस में बेहद लोगप्रिय होंगे।

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