अखिलेश सरकार गांव और किसानो की विरोधी: भाजपा

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने अखिलेश सरकार को गांव और किसानो का विरोधी बताते हुए गांव की बिजली दोगुनी मंहगी किये जाने का विरोध किया है। प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा ज्यादा आपूर्ति, ज्यादा दाम ज्यादा की बात करने वाली अखिलेश सरकार ने अपूर्ति कम तो दाम कम की बात अब तक कि क्या ? उन्होंने विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि धोखे से विद्युत मूल्य बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी न दे।

मंगलवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सरकार के इशारे पर 12 घंटे से ज्यादा विद्युत आपूर्ति के दायरे में आने वाले इलाको से शहरो के बराबर बिजली दर वसूली की कवायत दरसल गांव के लोगों के साथ साजिश है। राज्य में ध्वस्त होती विद्युुत वितरण व्यवस्था के कारण देश में सस्ती बिजली होने के बावजूद अखिलेश सरकार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही है ऐसे में यह तर्क बेमानी है कि अधिक विद्युत आपूर्ति पर अधिक दाम लिये जाये। विद्युत दर बढ़ाने की नियत से लिया जा रहा यह फैसला गांव के उपभोक्ताओं के साथ साजिश है। दो-चार दिन अधिक विद्युत देकर बाद में फिर हालात जस के तस हो जायेगे। किन्तु किसान-गांव के लोगों को बढ़ी विद्युत दरों के आधार पर भुगतान करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अपने चुनाव घोषणा पत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 22 घंटे विद्युत आपूर्ति करने की बात करने वाली समाजवादी पार्टी सरकार के अधिकारी अब कह रहे है कि 2016 से ग्रामीण इलाकों में 16 घंटे की विद्युत सप्लाई का शिड्यूल तय किया जा रहा है। स्पष्ट है सारी घोषणाएं महज ढपोरसंखी है क्योंकि पहले कहा 20 से 22 घंटे जब देने का शिड्यूल तय करना हुआ तो 16 घंटे पर तय कर रहे हे। और जब देना होगा तो उपभोक्ताओं के हाथ फिर खाली रहेगंे। क्योंकि जब तक विद्युत वितरण व्यवस्था के आधारभूत ढ़ाचे को व्यवस्थित नहीं किया जायेगा यह संभव ही नहीं है।

पाठक ने विद्युत नियामक आयोग से कहा कि उपभोक्ताओं का हित संरक्षित करते हुए आयोग गांव की ऐसी किसी प्रस्ताव जिससे ग्रामीण और किसानों पर भारी बोझ पड़ने जा रहा है को मंजूरी न दे। उन्होंने कहा कि पूरे होते वादे का दम्भ भरते सपा नेता जनहित की अंदेखी न करे। वैसे ही बीते 42 महीने में 40 से 50 प्रतिशत बिजली मंहगी की जा चुकी है बड़े पैमाने पर रेग्युलेटरी सरचार्ज वसूला जा रहा है। अब अधिक बिजली देने के नाम पर एक बार फिर बिजली मंहगी करने की कोशिश हो रही है।