अनिल यादव के कार्यकाल में हुई भर्ती की हो सीबीआई जांच

लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डा. अनिल यादव की बर्खास्तगी को प्रतिभाशाली बेरोजगार नौजवानों की जीत बताया है। भाजपा अध्यक्ष ने अनिल के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहरायी है। उन्होंने कहा कि जब अनिल की नियुक्ति अवैध है, तो उनके कार्यकाल में की गयी सभी चयन प्रक्रिया अवैध है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य बन गया है, जहां उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग जैसे महत्वपूर्ण अध्यक्षों की नियुक्तियां कोर्ट से रद्द की गयी हैं।डा. बाजपेयी ने कहा कि इन महत्वपूर्ण आयोगों के अध्यक्षों की नियुक्ति निरस्त किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने इन पदों पर नियुक्ति में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया तथा मेरिट की अनदेखी की। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार सूबे के लाखों बेरोजगार प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है।

उन्होंने कहा कि सूची में 83वें स्थान के व्यक्ति की उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति, आगरा निवासी व्यक्ति का मैनपुरी में एक दिन के ही अन्दर चरित्र प्रमाण पत्र जारी होना, अपने विरुद्ध आगरा के चार थानों में दर्ज अभियोगों का अनिल द्वारा छिपाना, चित्रगुप्ता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य पद से उनकी बर्खास्तगी जैसे तयों की अनदेखी कर अनिल की नियुक्ति करने में सरकार की नीयत स्वयं संदेह के घेरे में है।

डा. बाजपेयी ने कहा कि पीसीएस, पीसीएसजे, सहायक अभियोजना अधिकारी सहित जो दो दर्जन से ऊपर नियुक्तियां अनिल के कार्यकाल में हुईं, उन सभी की सीबीआई जांच से नियुक्तियों में हुए फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होगा। भाजपा अध्यक्ष ने खनन घोटाले के आरोपित गायत्री प्रसाद प्रजापति की सीबीआई जांच और बर्खास्तगी की मांग को भी दोहराया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. मनोज मिश्र ने कहा कि कोर्ट के निर्णय के बाद अब भ्रष्टाचार के खेल का अंत हो गया है। अनिल के कार्यकाल में नियुक्तियों में हुए फर्जीवाड़े के खिलाफ सबसे पहले भाजपा ने ही आवाज उठायी थी। अब उसके उठाये गये मुद्दे पर जीत मिली है।