आज होगा रोहित शेखर का पोस्टमार्टम, मौत का कारण चल सकेगा पता

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे दिवगंत एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। तबीयत खराब होने पर शाम करीब 4 बजकर 41 मिनट पर साकेत स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने रोहित को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि 40 वर्षीय रोहित की मौत अस्पताल में लाने से पहले ही हो गई थी। अस्पताल में रोहित की मां उज्ज्वला और पत्नी अपूर्वा शुक्ला भी मौजूद थीं। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद ही परिजनों को शव सौंपा जाएगा।

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डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस का कहना था मंगलवार शाम उनके कमरे में जब घर का नौकर खाना देने पहुंचा तो उसने बिस्तर पर लेटे रोहित के मुंह से खून आते देखा था। साथ ही तकिए पर भी खून जमा हुआ पाया गया है। देर रात दक्षिणी दिल्ली पुलिस के डीसीपी विजय कुमार ने बताया रोहित के शरीर पर किसी भी तरह की चोट के निशान नहीं मिले हैं। एम्स में बुधवार को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में रोहित तिवारी का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। उनकी मौत के पीछे की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगी।

एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद डीएनए जांच की बदौलत रोहित को एनडी तिवारी के बेटे के रूप में कोर्ट से मान्यता मिली थी। साल 2008 में रोहित ने कोर्ट में एनडी तिवारी के बेटे होने का दावा किया था। इस मामले को खारिज करने के लिए एनडी तिवारी की ओर से अपील भी की गई थी। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद डीएनए जांच कराने के आदेश दिए गए थे। जांच में रोहित का जैविक पिता साबित होने के बाद एनडी तिवारी ने भी उन्हें अपने बेटे के तौर पर अपना लिया था। पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को एनडी तिवारी का निधन हुआ था।

11 मई 2018 को मध्यप्रदेश की अपूर्वा शुक्ला के साथ रोहित तिवारी वैवाहिक बंधन में बंधे थे। दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर का जीवन पहचान पाने, लावारिस कहे जाने के दंश और पिता के जीवित होने के बावजूद अनाथ महसूस किए जाने की पीड़ा के बीच न्याय पाने के संघर्ष को समर्पित रहा। वे स्वयं अपने हालात को त्रिशूल और लावारिस फिल्मों की कहानी जैसा बताया भी करते थे। राजनीति में कॅरिअर बनाने की इच्छा कभी बीजेपी, कभी सपा और कभी कांग्रेस से जुडऩे के असमंजस के बीच परवान नहीं चढ़ पाई।

अभी छह दिन पहले उन्होंने कांग्रेस से जुडऩे की सार्वजनिक घोषणा की तो अचानक काल ने उन्हें आ घेरा। रोहित ने जीवन के 19 बेहतरीन वर्ष केवल मां को उनका सम्मान और खुद को पिता के प्यार का अधिकार दिलाने के संघर्ष में बिताए। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2014 में उन्हें यह अधिकार मिला तो पिता का प्यार पाने से ज्यादा उनकी देखरेख और सेवा में बिता दिया। 1979 में जन्मे रोहित 1990 तक एनडी तिवारी को परिवार के परिचित के रूप में ही जानते थे। जब 11 वर्ष की आयु में पहली बार उन्हें पता चला कि वे ही उनके पिता हैं तो वे असहज हो गए।

इसके बाद से तिवारी ने उनसे दूरी बना ली। 24 अप्रैल 2014 को कोर्ट ने तिवारी को रोहित का जैविक पिता घोषित किया। इसके बाद तिवारी ने रोहित को पुत्र के रूप में स्वीकार किया। रोहित के समर्पण प्यार और सम्मान से प्रभावित तिवारी ने उनके कहने पर 14 मई 2014 को उज्ज्वला शर्मा से बाकायदा विवाह भी किया। इसके कुछ वर्ष बाद धीरे धीरे तिवारी का स्वास्थ्य बिगडऩे लगा और 20 सितंबर 2017 को ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें साकेत मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। रोहित और उज्ज्वला ने रात दिन उनकी सेवा की। इसी बीच 18 मई 2018 को रोहित ने अपनी साथी वकील अपूर्व शुक्ला से विवाह किया। पिता के देहांत के बाद भी रोहित ने पुत्र के सभी दायित्व निभाए।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे दिवगंत एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। तबीयत खराब होने पर शाम करीब 4 बजकर 41 मिनट पर साकेत स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने रोहित को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि 40 वर्षीय रोहित की मौत अस्पताल में लाने से पहले ही हो गई थी। अस्पताल में रोहित की मां उज्ज्वला और पत्नी अपूर्वा शुक्ला भी मौजूद थीं। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद ही परिजनों को शव सौंपा जाएगा। डिफेंस कॉलोनी थाना पुलिस का कहना था मंगलवार शाम उनके कमरे में जब घर का नौकर खाना देने पहुंचा तो उसने बिस्तर पर लेटे रोहित के मुंह से खून आते देखा था। साथ ही तकिए पर भी खून जमा हुआ पाया गया है। देर रात दक्षिणी दिल्ली पुलिस के डीसीपी विजय कुमार ने बताया रोहित के शरीर पर किसी भी तरह की चोट के निशान नहीं मिले हैं। एम्स में बुधवार को मेडिकल बोर्ड की निगरानी में रोहित तिवारी का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। उनकी मौत के पीछे की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगी। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद डीएनए जांच की बदौलत रोहित को एनडी तिवारी के बेटे के रूप में कोर्ट से मान्यता मिली थी। साल 2008 में रोहित ने कोर्ट में एनडी तिवारी के बेटे होने का दावा किया था। इस मामले को खारिज करने के लिए एनडी तिवारी की ओर से अपील भी की गई थी। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद डीएनए जांच कराने के आदेश दिए गए थे। जांच में रोहित का जैविक पिता साबित होने के बाद एनडी तिवारी ने भी उन्हें अपने बेटे के तौर पर अपना लिया था। पिछले वर्ष 18 अक्टूबर को एनडी तिवारी का निधन हुआ था। 11 मई 2018 को मध्यप्रदेश की अपूर्वा शुक्ला के साथ रोहित तिवारी वैवाहिक बंधन में बंधे थे। दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे एनडी तिवारी के पुत्र रोहित शेखर का जीवन पहचान पाने, लावारिस कहे जाने के दंश और पिता के जीवित होने के बावजूद अनाथ महसूस किए जाने की पीड़ा के बीच न्याय पाने के संघर्ष को समर्पित रहा। वे स्वयं अपने हालात को त्रिशूल और लावारिस फिल्मों की कहानी जैसा बताया भी करते थे। राजनीति में कॅरिअर बनाने की इच्छा कभी बीजेपी, कभी सपा और कभी कांग्रेस से जुडऩे के असमंजस के बीच परवान नहीं चढ़ पाई। अभी छह दिन पहले उन्होंने कांग्रेस से जुडऩे की सार्वजनिक घोषणा की तो अचानक काल ने उन्हें आ घेरा। रोहित ने जीवन के 19 बेहतरीन वर्ष केवल मां को उनका सम्मान और खुद को पिता के प्यार का अधिकार दिलाने के संघर्ष में बिताए। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2014 में उन्हें यह अधिकार मिला तो पिता का प्यार पाने से ज्यादा उनकी देखरेख और सेवा में बिता दिया। 1979 में जन्मे रोहित 1990 तक एनडी तिवारी को परिवार के परिचित के रूप में ही जानते थे। जब 11 वर्ष की आयु में पहली बार उन्हें पता चला कि वे ही उनके पिता हैं तो वे असहज हो गए। इसके बाद से तिवारी ने उनसे दूरी बना ली। 24 अप्रैल 2014 को कोर्ट ने तिवारी को रोहित का जैविक पिता घोषित किया। इसके बाद तिवारी ने रोहित को पुत्र के रूप में स्वीकार किया। रोहित के समर्पण प्यार और सम्मान से प्रभावित तिवारी ने उनके कहने पर 14 मई 2014 को उज्ज्वला शर्मा से बाकायदा विवाह भी किया। इसके कुछ वर्ष बाद धीरे धीरे तिवारी का स्वास्थ्य बिगडऩे लगा और 20 सितंबर 2017 को ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें साकेत मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। रोहित और उज्ज्वला ने रात दिन उनकी सेवा की। इसी बीच 18 मई 2018 को रोहित ने अपनी साथी वकील अपूर्व शुक्ला से विवाह किया। पिता के देहांत के बाद भी रोहित ने पुत्र के सभी दायित्व निभाए।