इंजीनियर गुप्ता दंपती हत्याकांड से जल्द उठेगा पर्दा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के चर्चित इंजीनियर गुप्ता दंपती हत्याकांड से पर्दा जल्द ही उठ जाएगा। राज्य सरकार ने बदायूं के गुप्ता दंपती हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश कर दी है। इसके लिए राज्य के गृह विभाग ने केंद्र सरकार को संस्तुति पत्र भेज दिया है। दस अप्रैल 2015 को बदायूं में 70 वर्षीय वीके गुप्ता और उनकी पत्नी शन्नो गुप्ता के शव घर में मिले थे। दोनों के शरीर पर धारदार हथियार से किए गए घाव मौजूद थे। गुप्ता दंपती अपने छोटे बेटे मुकुल गुप्ता की 2007 में बरेली में एक फर्जी मुठभेड़ में हुई मौत की जांच में पैरवी कर रहे थे। इस फर्जी पुलिस मुठभेड़ की जांच भी सीबीआई कर रही है।

पुलिस ने घटना का खुलासा करने के लिए कई टीमों का गठन किया था। पुलिस ने संदेह के आधार पर घर में काम कर चुके नौकरों से लेकर रिटायर्ड इंजीनियर के करीबियों पर शक की सुई घुमाई और करीब चार दर्जन से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन नतीजा कोई नहीं निकला। पुलिस ने मृतक के परिजनों पर ही निशाना साधा और उनके बेटे और बेटियों से कई बार पूछताछ की। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस ने रिटायर्ड इंजीनियर के छोटे बेटे हेमंत गुप्ता पर शक जाहिर करते हुए अदालत से उसकी पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट की मंजूरी मांगी। मंजूरी मिलने के बाद पुलिस ने साइंटिफिक जांच कराई।

सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर 2010 में यह जांच शुरू की। उसने मुठभेड़ को फर्जी पाते हुए बरेली के तत्कालीन एएसपी रविंद्र गौड़ समेत कुल 10 पुलिसकर्मियों को दोषी माना था। सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी लेकिन राज्य सरकार ने रविंद्र गौड़ के खिलाफ अभियोजन की इजाजत नहीं दी थी। गुप्ता दंपती इस मामले की जमकर पैरवी कर रहा था। वे राज्य सरकार से गौड़ के खिलाफ अभियोेजन की स्वीकृति देने के लिए दबाव बना रहे थे। जिले के अधिकारियों ने गुप्ता दंपती के कत्ल को सनसनीखेज बताते हुए, इसे एक गंभीर प्रकरण माना था।