इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए सुपरटेक और आम्रपाली के प्रोजेक्‍ट गिराने के आदेश

इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को सुपरटेक, आम्रपाली और जगत तारन प्रोजेक्ट को 2 महीने के भीतर गिराने का आदेश दिया है| पतवारी गांव में श्‍मशान की जमीन पर बनाई गईं कई बड़ी कंपनियों की बिल्डिंग्स को 2 माह के भीतर गिरा दिया जाएगा। इन बड़ी कंपनियों में आम्रपाली बिल्‍डर्स के अलावा सुपरटेक अपार्टमेंट और जगत तरण प्रोजेक्‍ट शामिल हैं। हाईकोर्ट ने यह आदेश वकील शिवाकांत मिश्रा की जन‍हित याचिका पर दिया| 

ये प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा के पतवाडी और दो अन्य गांवों में हैं। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर ये प्रोजेक्ट हैं, वह कब्रिस्तान की जमीन है, इसी वजह से इसका विरोध हो रहा है। अब हाईकोर्ट ने बिल्डरों को गांव के किसानों को दो माह में जमीनें वापस करने तथा पिछले दस वर्षो के दौरान अधिग्रहीत जमीनों के संबंध में समस्त जानकारियों प्रकाशित करने के आदेश का पालन किया जाए। ऎसा नहीं करने पर संबंधित अधिकारी अवमानना के तहत दंडित किए जाएंगे। हाईकोर्ट पहले भी सुपरटेक के टि्वन टावर गिराने के आदेश दे चुका है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को ग्राहकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था।

यह जमीन गाँव की सोसायटी और तालाब की है। पतवाडी गांव में 2000 वर्ग मीटर, तुगलपुर में 35000 वर्ग मीटर और इटहरा में 6000 वर्ग मीटर में यह कंस्ट्रक्शन है। उल्लेखनीय है कि 19 जुलाई, 2011 को हाईकोर्ट ने पतवारी गांव की 589 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। अदालत ने उस समय यूपी सरकार को कडी फटकार लगाते हुए किसानों की जमीन वापस करने के लिए एक महीने की मोहलत दी थी। अपने उस आदेश में अदालत ने साफ तौर पर कहा था कि अगर एक महीने में किसानों को उनकी जमीन वापस नहीं की गई तो यूपी सरकार और नोएडा अथॉरिटी के अफसरों को अदालत की अवमानना का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कडी कार्रवाई की जाएगी।

मालूम हो कि उत्‍तर प्रदेश सरकार ने इं‍डस्ट्रियल डेवलमेंट के नाम पर गांव के तमाम किसानों की 589 हेक्‍टेयर जमीन अर्जेंसी क्‍लॉज के तहत अधिग्रहित कर ली थी। बाद में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने इसमें से काफी जमीन सुपरटेक, आम्रपाली और अजनारा जैसे बिल्‍डर्स को बेच दी थी।

Loading...