उबर कैब कांड पर एक नज़र

दिसम्बर 2014 : अमेरिका स्थित कंपनी उबर कैब सेवा प्रदाता के चालक शिव कुमार यादव पर वसंत विहार से अपने घर इंदल्रोक जा रही एक महिला के साथ टैक्सी में बलात्कार करने का आरोप लगा।

7 दिसम्बर : दिल्ली पुलिस ने यादव को उप्र के मथुरा से गिरफ्तार किया।

8 दिसम्बर : यादव को अदालत में पेश किया गया और फिर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उसने शिनाख्त परेड के लिए जाने से इंकार कर दिया । एक अन्य अदालत से आते हुए उसे पीड़िता ने बतौर हमलावर पहचाना।

17 दिसम्बर : कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए जालसाजी के एक अन्य मामले में यादव को पुलिस हिरासत में भेजा गया।

24 दिसम्बर : पुलिस ने घटना के 19 दिन बाद बलात्कार मामले में यादव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

5 जनवरी 2015 : न्यायाधीश ने आरोप पत्र का संज्ञान लिया और मामला सत्र अदालत में भेजा ।

9 जनवरी : विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने पर दलीलें सुनना शुरू किया। मामले में विशेष सरकारी वकील की नियुक्ति।

13 जनवरी : अदालत ने यादव पर बलात्कार करते हुए पीड़ित की जान खतरे में डालने, उसे विवाह के लिए बाध्य करने के इरादे से उसका अपहरण करने, आपराधिक तरीके से उसे धमकाने और उसे चोट पहुंचाने के आरोप तय किए । न्यायाधीश ने दिन प्रतिदिन आधार पर सुनवाई का आदेश दिया ।

15 जनवरी : सुनवाई शुरू, पीड़िता ने अदालत में गवाही दी और आरोपी की शिनाख्त की।

17 जनवरी : अदालत ने पीड़िता का बयान दर्ज करने की प्रक्रि या पूरी की।

31 जनवरी : अभियोजन पक्ष की सबूत पेश करने की प्रक्रि या पूरी हुई।

3 फरवरी : आरोपी का बयान लिया गया, जिसने बलात्कार के आरोपों को नकारा और खुद को बेकसूर बताया।

11 फरवरी : अदालत ने मामले में अंतिम दलीलों के लिए 16 फरवरी की तारीख नियत करते हुए कहा कि आरोपी सुनवाई में विलंब की कोशिश कर रहा है ।

16 फरवरी : आरोपी ने अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों को फिर से बुलाने की मांग की।

18 फरवरी : गवाहों को फिर से बुलाने की आरोपी की मांग खारिज।

19 फरवरी : अंतिम दलीलें शुरू करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी को सिर्फ पीड़िता की गवाही पर ही दोषी ठहराया जा सकता है।

19 फरवरी : अभियोजन पक्ष के 28 गवाहों से फिर से जिरह किए जाने के आग्रह को ठुकराने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ चालक ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

4 मार्च : उच्च न्यायालय ने पीड़िता सहित अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों को फिर से बुलाने की आरोपी की अपील को मंजूरी दी।

5 मार्च : निचली अदालत में बचाव पक्ष के वकील ने पीड़िता से फिर से सवाल जवाब किया। महिला ने कहा कि प्रक्रि या में विलंब की वजह से वह सदमे में है।

9 मार्च : गवाहों को फिर से बुलाने के लिए आरोपी को मंजूरी दिए जाने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पीड़िता की अपील पर उच्चतम न्यायालय 10 मार्च को सुनवाई करने पर सहमत।

10 मार्च : उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश और निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाई तथा पीड़िता की अपील पर पुलिस और आरोपी को नोटिस जारी किए ।

13 अगस्त : पीड़िता और पुलिस की अपील पर उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा।

10 सितम्बर : दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पीड़िता और गवाहों से दोबारा जिरह न की जाए और साथ ही उसने सुनवाई पर लगी रोक हटा दी।

15 सितम्बर : उच्चतम न्यायालय के पास से रिकॉर्ड्स न पहुंच पाने के कारण निचली अदालत अंतिम दलीलों को नहीं सुन सकी।

24 सितम्बर : आरोपी ने पुलिस पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया।

7 अक्टूबर : बचाव पक्ष के वकील ने जिरह पूरी की, अदालत ने फैसला 20 अक्टूबर तक के लिए सुरक्षित रखा।

20 अक्टूबर : अदालत ने यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (एम), 366, 323 और 506 के तहत अपराधों का दोषी ठहराया। उसे दी जाने वाली सजा के अनुपात पर अदालत 23 अक्टूबर को दलीलें सुनेगी।

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