एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लक्षण दिखे तो तुरंत करें इलाज

लखनऊ| हर वक़्त घबराहट होना, काम में मन न लगना, एक काम अधूरा रहते हुए दूसरे काम पर ध्यान जाना, मन में अनहोनी का डर होना, छोटी छोटी बातों पर टेंशन लेना हर समय की इस असहजता और डर की भावना को विशेषज्ञ एंग्जाइटी कहते हैं| आजकल के भागदौड़ की जिंदगी में ये बीमारी आम होती जा रही है| लंबे समय तक एंग्जाइटी का बना रहना कई अस्वस्थ आदतों और रोगों का शिकार बना देता है। और इलाज न करने पर ये बिमारी बढ़ती ही जाती है| आईये जानते हैं कि खुद को इसका शिकार बनने से कैसे रोक सकतें हैं|

आज के जीवन शैली कोई भी ऐसा इंसान नहीं जिसे चीनताओं का सामना नहीं करना पड़ता है| लेकिन अगर किसी इंसान में ये चिंताएं आवशयकता से अधिक बढ़ जाए तो एक बीमारी का रूप ले लेती है| इसे ही एंग्जाइटी कहतें हैं और अगर ये 6 महीने से अधिक समय तक बने रहें तो यह समस्या अत्यंत गंभीर हो जाती है और जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने लगती है। यह बीमारी के शिकार खासतौर पर शहरों में यह 15-35 आयु वर्ग के बनते हैं| पुरुषों की तुलना में महिलाएं जल्दी इसकी शिकार बनती हैं।

एंग्जाइटी डिसऑर्डर क्या है….

इस बीमारी के लक्षण असामान्य होतें हैं जैसे- हर समय चिंता, बेचैनी, अनावश्यक डर, मन न लगना हमारे दिमाग पर एक प्रभाव छोड़ती है| एंग्जाइटी के प्रमुख लक्षण थकान, सिरदर्द और अनिद्रा हैं। हर व्यक्ति में ये लक्षण एक जैसे नहीं हो सकते| लेकिन स्थायी डर और चिंता सभी में देखे जाते हैं। अगर इन लक्षणों के समाने आने पर इंसान काबू कर ले बीमारी से निजात मिल सकती है नहीं तो एंग्जाइटी डिसऑर्डर हो जाता है और रोजमर्रा का जीवन और कार्य करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

कितने प्रकार के होते हैं’….

ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर: इसमें मरीज लगातर डर में जीता है| इन्हे ज्यादा अपने भविष्य का डर सताता रहता है| अजीबो गरीब हरकतें करने लगता है| किसी पर भरोसा नहीं करता|

पैनिक डिसऑर्डर: इसमें मरीज को लगता है जैसे उनकी सांस रुक रही है या उन्हें हार्ट अटैक आ रहा है।

पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस: यह बीमार किसी भयानक घटना के बाद उत्पन्न होती है जैसे यौन शोषण या शारीरिक हमला या किस प्रकार की प्राकृतिक आपदा। इसमें मरीज को घटनाएँ बार बार याद आतीं हैं| वो अनियंत्रित हो जाता है|

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर: इसमें मरीज लोगों से कम मिलना जुलना पसंद नहीं करता है| कोई भी काम करता है उसे डरते हुए करता है कि कहीं उससे गलती न हो जाए| उसे लगता है कि सबका ध्यान उनकी ही तरफ है|

एंग्जाइटी के दुष्प्रभाव….

अगर ये ज्यादा समय रहा तो इंसान को हर तरफ से प्रभावित रहती है| बे समय तक रहने पर अवसाद हो सकता है। मरीज लोगों से मिलना पसंद नहीं करता| पूरी तरह समाज से कटा कटा रहने लगता है| किस काम में ध्यान नहीं लगता, नींद नहीं आती याददाश्त भी प्रभावित होती है।

कारण क्या हैं….

एंग्जाइटी डिसऑर्डर का वास्तविक कारण पता नहीं है, इस बीमारी के लिए कोई स्पष्ट कारण जिम्मेदार नहीं| एंग्जाइटी में शरीर से एपिनिफ्रिंन्स हार्मोन स्नवित होते हैं, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, थकावट व सांस रुकने लगती है।

बचाव …..

अपने जीवन शैली में बदलाव करें, समय पर सोने की कोशिश करें, लोगों से मिलना जुलना शुरू करें, हंसी मजाक का हिस्सा बने, काम में मन लगाएं| साथ में साइको थेरेपी लें| इसमें मरीज के मानसिक अवस्था का अध्यन किया जाता है| योग करने से भी हम इस बीमारी को दूर भगा सकतें हैं|

मनोवैज्ञानिक से मिलें …

हमारे देश में मानसिक बीमारियां इसलिए भी बढ़ जातीं हैं क्योंकि या तो लोग इसे बीमारी नहीं समझा पाते या इस बीमारी के शर्म की वजह से डॉक्टर से इलाज नहीं करा पाते| लक्षण दिखाई देती ही डॉक्टर से संपर्क करें| दवाओं से किसी मानसिक रोग के उपचार को फार्मेकोथेरेपी कहते हैं। एंग्जाइटी डिसऑर्डर के उपचार के लिये बाजार में कईं प्रभावकारी दवाएं उपलब्ध हैं। कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।

अगर हम आकंड़ों कि बात करें तो भारत के महानगरों में 15.20 % लोग एंग्जाइटी और 15.17 % लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। देश के महानगरों में करीब 50% ऐसे लोग हैं जो अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते। और अच्छी नींद के न होने से कई बीमारियां होती हैं|