एनआरएचएम घोटाला: मायावती के जवाब से असंतुष्ट सीबीआई प्रदीप शुक्ला को सामने बैठा फिर करेगी पूछताछ

लखनऊ। एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से दो दिन पहले की गई पूछताछ में मिले जवाबों से संतुष्ट नज़र नहीं आ रही है। उम्मीद की जा रही है कि सीबीआई मायावती को दोबारा तलब करने  की तैयारी मे है। सूत्रों की माने तो इस बार सीबीआई मायावती और घोटाले के मुख्य आरोपी आईएएस प्रदीप शुक्ला को आमने सामने  बैठाकर पूछताछ करेगी। इसके अलावा मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान सचिव रहे एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को भी जांच में शामिल किये जाने की योजना है।

मालूम हो कि बीते 2 अक्टूबर को सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से पूछताछ की थी। करीब दो घंटे चली सीबीआई अधिकारियों की पूछताछ के दौरान मायावती ने महत्वपूर्ण सवालों से कथित तौर पर बचने की कोशिश की और मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ फैसलों के बारे में अनभिज्ञता तक जाहिर कर दी ।

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विभाजन और जिला परियोजना अधिकारियों के 100 पद सृजित करने को लेकर मायावती के खिलाफ नए सबूत मिलने का दावा किया था जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि एनआरएचएम योजनाओं के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के पीछे जिला परियोजना अधिकारियों की कथित भूमिका बताई जाती है।

जब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का विभाजन हुआ था तब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। हाल ही में मायावती ने केंद्र पर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि मामले में उनकी संलिप्तता है ही नहीं।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का विभाजन इसलिए किया गया ताकि एनआरएचएम के कोषों को परिवार कल्याण विभाग के प्रभार के अंतर्गत सीधे तौर पर रखा जा सके। यह विभाग तब मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा के पास था, जिनके खिलाफ एजेंसी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

सीबीआई का दावा है कि परिवार कल्याण विभाग में उन लोगों को ही जिला परियोजना अधिकारियों के पद पर नियुक्त किया गया जिन्होंने चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को कथित तौर पर ठेके दिए और इसके बदले में आरोपी लोक सेवकों को कथित भ्रष्टाचार की भारी रकम मिली।सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कथित आपराधिक षड्यंत्र में स्वास्थ्य विभाग के विभाजन का प्रस्ताव दिया गया और केंद्र सरकार द्वारा एनआरएचएम के लिए तय मानकों के खिलाफ जा कर मंजूरी ली गई।

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