एनआरएचएम घोटाला: सीबीआई ने सीएमओ कार्यालय से तलब कीं कुछ अहम फाइलें

लखनऊ| उत्तर प्रदेश में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई की नज़र सीएमओ कार्यालय पर है। सीबीआई ने मामले की जांच के लिए कुछ अहम फाइलें तलब की हैं। इससे सीएमओ कार्यालय के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक में हड़कंप मचा है।कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

सीएमओ से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़, जाँच एजेंसी ने मुख्य रूप से वर्ष 2009 से 2011 के दौरान अंधता निवारण कार्यक्रम और जननी सुरक्षा योजना से संबंधित फाइलें तलब की हैं। 28 सितंबर से सीएमओ कार्यालय के बाबू और अकाउंटेंट सीबीआई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। साथ ही पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त किया जा रहा है। कुछ ऐसी फाइलें भी सहेजी जा रही हैं, जिन्हें भविष्य में सीबीआई तलब कर सकती है। फाइलों की जांच पूरी होने के बाद इनको तैयार करने वाले बाबू और इन पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले अभी पिछले दिनों सीबीआई ने इस मामले में बसपा सुप्रीमों व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से पूछताछ की| आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस घोटाले में व्यापक षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआई ने मायावती से पूछताछ की। एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक 74 एफआईआर दर्ज की हैं और 48 आरोप पत्र दाखिल किए हैं। सीबीआई अधिकारियों की पूछताछ के दौरान मायावती ने महत्वपूर्ण सवालों से कथित तौर पर बचने की कोशिश की और मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ फैसलों के बारे में अनभिज्ञता तक जाहिर की।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विभाजन और जिला परियोजना अधिकारियों के 100 पद सृजित करने को लेकर मायावती के खिलाफ नए सबूत मिलने का दावा किया था जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि एनआरएचएम योजनाओं के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के पीछे जिला परियोजना अधिकारियों की कथित भूमिका बताई जाती है। जब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का विभाजन हुआ था तब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। प्रतिक्रिया के लिए वह या उनकी पार्टी का कोई सदस्य तत्काल उपलब्ध नहीं हुआ। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र पर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि मामले में उनकी संलिप्तता है ही नहीं।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का विभाजन इसलिए किया गया ताकि एनआरएचएम के कोषों को परिवार कल्याण विभाग के प्रभार के अंतर्गत सीधे तौर पर रखा जा सके। यह विभाग तब मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा के पास था, जिनके खिलाफ एजेंसी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। एजेंसी का दावा है कि परिवार कल्याण विभाग में उन लोगों को ही जिला परियोजना अधिकारियों के पद पर नियुक्त किया गया जिन्होंने चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को कथित तौर पर ठेके दिए और इसके बदले में आरोपी लोक सेवकों को कथित भ्रष्टाचार की भारी रकम मिली।

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