कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में अखिलेश सरकार नाकाम, पुलिस हिरासत में हो रही मौतें

आगरा: पिछले कुछ महीनो पर नज़र डालें तो साफ़ जाहिर होता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर जमकर खिलवाड़ हो रहा है| प्रदेश में अपराध का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है| यहाँ हिरासत में मौत आम बात हो गयी हैं| ताजा मामला उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से है जहां आज एत्मादपुर थाना में पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री से युवक की मौत हो गई। युवक को कल रात पुलिस ने किसी मामले में पूछताछ के लिए उठाया था। बवाल के साथ सीओ व इंस्पेक्टर हमराह के साथ थाना छोड़कर भाग खड़े हुए। इस मामले में इंस्पेक्टर व तीन दरोगा समेत पांच को निलंबित कर दिया गया, जबकि सीओ की जांच का आदेश दिया गया है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एत्मादपुर थाना क्षेत्र के भागूपुर के 26 वर्षीय विजयपाल पुत्र कालीचरन को कल रात पुलिस ने करीब सवा आठ बजे रात को पुलिस ने गांव से उठाया था। पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली लूटकर भागते लुटेरों का साथी बताकर विजयपाल को थाने में लाकर थर्ड डिग्री दी। देर रात उसकी हवालात में मौत हो गई। इसके बाद गुपचुप तरीके से उसे अस्पताल पहुंचाने के बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया गया। इसी बीच परिजनों को उसकी मौत की खबर मिल गई।

विजयपाल के परिजन देर रात थाने पर पहुंच गए। उस समय थाने पर सीओ एत्मादपुर अखिलेश भदौरिया और इंस्पेक्टर राजा सिंह मौजूद थे। परिजनों उनसे विजय के बारे में पूछा तो वे अनभिज्ञ बन गए। परिजनों ने इसके बाद बवाल शुरू किया। इसके बाद सीओ और इंस्पेक्टर थाना से भाग गये। उन्हें देखकर थाने का पूरा स्टाफ भी चला गया। गुस्साए लोगों ने थाने में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने सुबह पांच बजे विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह के पहुंचने पर हंगामा बंद किया। इसके बाद मृत युवक के भाई ने सीओ अखिलेश भदौरिया, इंस्पेक्टर राजा सिंह, एसएसआइ शत्रुंजय सिंह, एसआइ किशन स्वरूप पाल, एसआइ प्रदीप सैंगर और कांस्टेबल विवेक यादव के अलावा पांच अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस हिरासत में कैदियों की मौत हो रही है इससे पहले भी कई मामले इस तरह के आ चुके हैं लेकिन अखिलेश सरकार कार्यवाई करने के बजाय हाथ पर हाथ रखे हुए बैठी है|