ग्राम प्रधान के चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त

Lucknow bench high court
ग्राम प्रधान के चुनाव टालने पर हाईकोर्ट सख्त
इलाहाबाद| उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने बुधवार को केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया| एक याचिका की सुनवाई करते हुए लखनऊ बेंच ने कहा कि पंचायत चुनाव पांच साल के अंदर न करवाने की वजह से संवैधानिक संकट पैदा हो गया है जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है| लखनऊ हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस…

इलाहाबाद| उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने बुधवार को केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया| एक याचिका की सुनवाई करते हुए लखनऊ बेंच ने कहा कि पंचायत चुनाव पांच साल के अंदर न करवाने की वजह से संवैधानिक संकट पैदा हो गया है जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है| लखनऊ हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश क्यों न कि जाए|

यह मामला प्रदेश में ग्राम पंचायत के प्रधान पद के चुनाव को टालने का है| एक  याचिका में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत चुनाव कराये जाने और प्रधान और सदस्य पद के चुनाव स्थगित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी| याचिका के अनुसार उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग ने ग्राम प्रधानों और ग्राम सभा सदस्यों के आरक्षण को अगला आदेश आने तक स्थगित कर दिया गया है. जिला पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है, बीडीसी चुनाव भी अपने तय समय पर ही होंगे| जबकि संविधान के प्रावधान के अनुरूप प्रधानों का 5 वर्ष का कार्यकाल 7 नवंबर को पूरा हो रहा हैं और जबकि जिला पंचायतों का कार्यकाल 17 जनवरी 2016 तक ख़त्म होगा| क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 13 मार्च तक पूरा होगा| इसलिए नियमानुसार पहले ग्राम प्रधान पद के चुनाव होने चाहिए|

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