चीन से आगे निकला भारत, श्रीहरिकोटा से एस्ट्रोसैट सैटेलाइट लॉन्च

चीन से आगे निकला भारत, श्रीहरिकोटा से एस्ट्रोसैट सैटेलाइट लॉन्च

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)| भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘एस्ट्रोसैट’ और छह विदेशी उपग्रहों को लेकर जाने वाले रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया है।

रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह ठीक 10 बजे किया गया। 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) रॉकेट पोर्ट पर लांच पैड से अलग हुआ।

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इस अभियान को पूरा करने के साथ ही भारत कुछ विशिष्ट देशों की श्रेणी में शामिल हो गया। इस श्रेणी में अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ही शामिल हैं। चीन के पास अपनी अंतरिक्ष वेधशाला नहीं है।

क्या है एस्ट्रोसैट ?

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इसरो के मुताबिक स्पेस से सैटेलाइट के जरिए धरती पर होने वाले बदलावों का साइंटिफिक एनालिसिस करना इस मिशन का मकसद है। एस्ट्रोसैट के जरिए अल्ट्रावायलेट रे, एक्स-रे, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसी चीजों को यूनिवर्स से परखा जाएगा।

इसके साथ ही, मल्टी-वेवलेंथ ऑब्जर्वेटरी के जरिए तारों के बीच दूरी का भी पता लगाया जाएगा। सुपर मैसिव ब्लैक होल की मौजूदगी के बारे में भी पता लगाने में भी एस्ट्रोसैट से मदद मिल सकती है। इसरो के बनाए पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की यह 31वीं फ्लाइट है।

इस मिशन में इसरो के अलावा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी – एस्ट्रोफिजिक्स और रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल है।

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