छापेमारी के बाद गिरने लगे दालों के भाव, 50 रु0 प्रतिकिलो तक हुई सस्ती

नई दिल्ली। दो दिन पहले तक 210 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रही दाल मीडिया की सुर्खियों के साथ और ऊपर बढ़ती दिख रहीं थीं। उम्मीद की जा रही थी दीवाली तक 210 रुपए किलो वाली दाल 250 रुपए किलो हो जाएगी, लेकिन कुछ राज्य सरकारों द्वारा में पिछले तीन दिनों के भीतर दाल जमाखोरों के खिलाफ की गई छापेमारी के बाद दालों की कीमतें उसी तेजी के साथ नीचे आना शुरू हुई हैं जिस तेजी से ऊपर जा रहीं थी।

मिल रही जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में अरहर (तुअर) की कीमत पिछले तीन दिनों में 50 से 40 रुपए प्रति किलो तक गिरी है। बताया जा रहा है कि छापेमारी के डर से थोक बाजार में दाल की आमद बढ़ी है जिससे पिछले मंगलवार और बुधवार को लगातार दालों के भाव नीचे आए हैं। थोक बाजार में तुअर दाल के भाव 55 से 60 रुपए प्रतिकिलो तक गिर चुके हैं। जिस वजह से फुटकर बाजार में यही दाल 160 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है।

वहीं महाराष्ट्र सरकार द्वारा भी दाल जमाखोरों के खिलाफ जबर्दस्त तरीके से छापेमारी की जा रही है। अभी तक छापेमारी का अभियान केवल 16 जिलों में चलाया गया है। जिसमें करीब 23,000 टन दालों को जब्त किया गया है। जिसमें तुअर और उरद की दाल की बड़ी मात्रा में जब्त हुई है। बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों की कार्रवाई में करीब 276 छापे मारे गए हैं। सरकारी कार्रवाई का असर दाल के बाजार भाव पर भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र में तुअर की दाल की खुदरा दाम 175 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। इन दो राज्यों के अलावा कर्नाटक, तेहलांगाना और आंध्रप्रदेश में भी जमा खोरों के खिलाफ अभियाना चलाया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक की छापेमारी में 3000 मीटरिक टन दालें जब्त की जा चुकीं हैं।

दालों की बढ़ती कीमत पर घिरने के बाद केन्द्र सरकार ने भी दालों का बड़े स्तर पर आयात किया है। जिसमें से 3000 मीटरिक टन दाल की पहली खेप भारत आ चुकी है। अगली खेप दीपावली के बाद तक बाजार में पहुंच जाएगी। केन्द्र सरकार का दावा है कि दीपावली के बाद दाल की भाव सामान्य हो जाएंगे। तत्वरित राहत के लिए केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय भंडारण के माध्यम से 120 रुपए प्रतिकिलो के भाव वाली दाल उपलब्ध करवाई है और राज्य सरकारों को निर्देश दिये हैं की वे दाल जमाखोरों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई करें। जिसके बाद से कई राज्य सरकारों ने कार्रवाई करने के साथ ही इस समस्या के निपटने के लिए बाजार भाव से कम कीमत पर दाल बेंचने की योजना बनाई है। जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकारी प्रयासों से जमाखोंरों पर असर पड़ेगा और खुले बाजार में दालों के भाव जल्द नीचे आ जाएंगे।

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