जब एसपी सिंह हट सकते हैं तो शंभू यादव, एसके रघुवंशी, अजय अग्रवाल, मुकेश और प्रभात मित्तल क्यों नहीं?

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग के सचिव श्रीप्रकाश सिंह को काम करने से रोक दिया है तथा मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है कि सेवानिवृत्त पदेन सचिव, विशेष कार्याधिकारी को कैडर पद पर कैसे नियुक्ति किया गया। कोर्ट की इस बड़ी कार्रवाई से सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक अमले में यह सवाल जोरशोर से गूंजने लगा है कि हाईकोर्ट के आदेश से जब नगर विकास सचिव पद पर तैनात रिटायर आईएएस अधिकारी एसपी सिंह हट सकते हैं तो मुख्यमंत्री के सचिव शंभू सिंह यादव, सतर्कता सचिव एसके रघुवंशी, सचिवालय प्रशासन सचिव प्रभात मित्तल और सचिव वित्त के पद पर नियुक्त अजय अग्रवाल और मुकेश मित्तल क्यों नहीं? एसके रघुवंशी के मामले में एसपी सिंह के आधार पर ही हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर कर दी गई है।

कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्त अधिकारी की पुनर्नियुक्ति का अधिकार केन्द्र सरकार को है। राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं है। लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी के बिना श्रीप्रकाश सिंह, शंभू सिंह यादव, एसके रघुवंशी, अजय अग्रवाल, मुकेश मित्तल और प्रभात मित्तल की पुनर्नियुक्ति आईएएस काडर पोस्ट पर कर दी| अखिलेश यादव सरकार ने ऐसा करके भारतीय सेवा नियमावली की अनदेखी की।

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव एसपी सिंह आईएएस थे। वह रिटायर हो चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें विभाग के प्रमुख सचिव पद का चार्ज दे दिया गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक नगर विकास मंत्री आजम खां का एसपी सिंह पर वरदहस्त है। राज्य में सपा की सरकार बनने के बाद जब आजम नगर विकास मंत्री बने तो एसपी सिंह को प्रमुख सचिव के पद पर बैठा दिया। आजम खां के सारे काम वही निपटाते हैं। एसपी सिंह के तार भी ऊपर तक हैं। यही वजह है कि उनकी गिनती भी बेअंदाज अफसरों में की जाती है।

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मार्च 2012 में आजम खां के मंत्री बनने के बाद से नगर विकास विभाग में दो बार प्रमुख सचिव पद के लिए आईएएस अधिकारियों की तैनाती हुई, लेकिन कोई भी आईएएस आजम खां के रवैये के कारण विभाग में नहीं टिका। यह भी बता जा रहा है कि पिछले साढ़े तीन सालों में नगर विकास विभाग में तैनात हुए दो प्रमुख सचिव केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा चुके हैं। एसपी सिंह मूलत: पीसीएस सेवा के अधिकारी हैं। किसी जमाने में वह बसपा सरकार के सबसे ताकतवर अफसर पीएल पुनिया के खास हुआ करते थे। मगर 2005 में तत्कालीन सपा सरकार में आजम खां के उस समय करीब आए जब वह लखनऊ नगर निगम में नगर आयुक्त थे। एसपी सिंह की गिनती तेज तर्रार अफसरों में होती रही है।

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