जब महात्‍मा गांधी ने किए थे रामलला के दर्शन, मूर्तियों को खादी पहनाने की दी थी सलाह

Mahatma gandhi in ayodhya
जब महात्‍मा गांधी ने किए थे रामलला के दर्शन, मूर्तियों को खादी पहनाने की दी थी सलाह

नई दिल्‍ली। देश के सबसे संवेदनशील मामलों में शामिल अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद की सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन चल रही सुनवाई आज शाम तक पूरी हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 17 अक्टूबर तक केस की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा निर्धारित की थी। हालांकि बाद में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 16 अक्टूबर तक मामले की सुनवाई खत्म करने की समय सीमा तय कर दी थी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस माह के अंत या अगले माह के शुरूआती हफ्ते तक इस बहुप्रतीक्षित केस में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है। ऐसे मौके पर हम आपको वह वाक्या बताने जा रहे हैं जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे थे।

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राष्ट्रपिता महात्‍मा गांधी वर्ष 1921 में देश की यात्रा करते हुए लखनऊ पहुंचे थे। उन्‍होंने 26 फरवरी, 1921 को लखनऊ में भाषण दिया था। इसी समय वे अयोध्‍या भी गए थे। गांधी की इस अयोध्‍या-यात्रा का विवरण ‘गांधी वाड्मय खंड’ 19 के पेज 461 पर दिया गया है। यह नवजीवन अखबार में 20 मार्च 1921 को छपा। गांधी ने नवजीवन, 20 मार्च 1921 को इसका विवरण इस प्रकार दिया है- ‘अयोध्‍या में जहां रामचंद्र जी का जन्‍म हुआ, कहा जाता है उसी स्‍थान पर छोटा-सा मंदिर है। जब मैं अयोध्‍या पहुंचा तो वहां मुझे ले जाया गया। श्रद्धालु असहयोगियों ने मुझे सुझाव दिया कि मैं पुजारी से विनती करूं कि वह सीताराम की मूर्तियों के लिए पवित्र खादी का उपयोग करें।

500 साल पुराने विवाद का होगा अंत

मालूम हो कि अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद करीब 500 साल पुराना है। माना जाता है कि इस विवाद की शुरूआत 1528 में तब हुई थी जब मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर को गिराकर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी वजह से इसे बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा था। विवादित स्थल पर हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों में मालिकाना हक का विवाद सबसे पहले 1813 में शुरू हुआ, जब हिंदुओं ने इस स्थल पर अपने हक की आवाज उठाई।

नई दिल्‍ली। देश के सबसे संवेदनशील मामलों में शामिल अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद की सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन चल रही सुनवाई आज शाम तक पूरी हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 17 अक्टूबर तक केस की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा निर्धारित की थी। हालांकि बाद में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 16 अक्टूबर तक मामले की सुनवाई खत्म करने की समय सीमा तय कर दी थी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस माह के अंत या अगले माह के शुरूआती हफ्ते तक इस बहुप्रतीक्षित केस में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकता है। ऐसे मौके पर हम आपको वह वाक्या बताने जा रहे हैं जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे थे। राष्ट्रपिता महात्‍मा गांधी वर्ष 1921 में देश की यात्रा करते हुए लखनऊ पहुंचे थे। उन्‍होंने 26 फरवरी, 1921 को लखनऊ में भाषण दिया था। इसी समय वे अयोध्‍या भी गए थे। गांधी की इस अयोध्‍या-यात्रा का विवरण 'गांधी वाड्मय खंड' 19 के पेज 461 पर दिया गया है। यह नवजीवन अखबार में 20 मार्च 1921 को छपा। गांधी ने नवजीवन, 20 मार्च 1921 को इसका विवरण इस प्रकार दिया है- 'अयोध्‍या में जहां रामचंद्र जी का जन्‍म हुआ, कहा जाता है उसी स्‍थान पर छोटा-सा मंदिर है। जब मैं अयोध्‍या पहुंचा तो वहां मुझे ले जाया गया। श्रद्धालु असहयोगियों ने मुझे सुझाव दिया कि मैं पुजारी से विनती करूं कि वह सीताराम की मूर्तियों के लिए पवित्र खादी का उपयोग करें।

500 साल पुराने विवाद का होगा अंत

मालूम हो कि अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद करीब 500 साल पुराना है। माना जाता है कि इस विवाद की शुरूआत 1528 में तब हुई थी जब मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर को गिराकर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी वजह से इसे बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा था। विवादित स्थल पर हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों में मालिकाना हक का विवाद सबसे पहले 1813 में शुरू हुआ, जब हिंदुओं ने इस स्थल पर अपने हक की आवाज उठाई।