झूठ का हवामहल बनाने में मायावती का कोई जवाब नहीं: सपा

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि झूठ का हवामहल बनाने में बसपा अध्यक्ष का कोई जवाब नहीं है। बसपा राज में लूट का कारोबार चलाने की वजह से जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसके बाद हताशा में वे अनर्गल बयानबाजी का रिकार्ड बनाने पर तुल गई है। समाजवादी पार्टी को सन् 2012 के विधान सभा चुनावो में पूर्ण बहुमत मिला और उसकी समाजवादी सरकार ने विकास का जो नया एजेण्डा प्रदेश को दिया उससे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति जनता का विश्वास गहरा हुआ है। लोगों ने देखा कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा जनहित के कामों पर खर्च हो रहा है, पार्को, स्मारकों और मुख्यमंत्री की प्रतिमाओं पर नहीं।

बसपा अध्यक्ष की साख न तो उत्तर प्रदेश में बची है और नहीं बिहार में। अन्य प्रदेशों में भी उनकी पार्टी की कोई पूछ नहीं है। ऐसी दशा में अवसादग्रस्त बसपा अध्यक्ष की कुंठा स्वाभाविक है। यह भी उनकी खराब आदत रही है कि वे उत्तर प्रदेश का अपमान करने का कोई भी अवसर नहीं चूकती है। वे समाजवादी सरकार पर ऊलजलूल आरोप मढ़ती है। सब जानते है कि भाजपा का लम्बा साथ स्वयं बसपा अध्यक्ष का ही रहा है। बसपाराज भाजपा के समर्थन संरक्षण में चला। एक समय तो भाजपा-बसपा के बीच भाई बहिन के गाढ़े रिश्ते बन गए थे। गोधरा कांड के बाद भी बसपा अध्यक्ष गुजरात मोदी के पक्ष में प्रचार करने गई थी।

जिसकी स्वयं भाजपा के साथ गहरी दोस्ती रही हो वह समाजवादी पार्टी पर भाजपा के साथ रिश्ते पर बात कैसे कर सकती है? सब जानते हैं कि भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों का पुरजोर विरोध समाजवादी पार्टी ही करती आई है। भाजपा ने समाजवादी सरकार के साढ़े तीन सालों में सिर्फ समाजवादी पार्टी के लिए दिक्कतें ही खड़ी की है। मुजफ्फरनगर, कांठ, मथुरा, अयोध्या, दादरी में अशांति और अराजकता पैदा करने में भाजपा की साजिशों को समाजवादी सरकार ने ही विफल किया है।

यह बात दिन के उजाले की तरह सर्वविदित है कि श्री मुलायम सिंह यादव समाजवाद, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध और संघर्षरत रहे हैं। उनका पांच दशक का सक्रिय राजनीतिक जीवन इस बात का गवाह है कि उन्होने कमी अपने सिद्धांतो से समझौता नहीं किया। अपनी सरकार गंवाने का खतरा उठाकर भी उन्होने भाजपा की चालें विफल की है और आज भी वे सांप्रदायिकता के खिलाफ पहले की तरह कटिबद्ध हैं। बिहार में समाजवादी पार्टी ने सैद्धांतिक हस्तक्षेप किया हैं। उसका उद्देश्य सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है और बिहार की प्रगति की गारंटी देना है।