दिल्ली पहुंचे नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा, भारत से संबन्ध सुधारना होगी प्राथमिकता

नई दिल्ली। पड़ोसी देश नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद उसके और भारत के बीच पनपी दूरियों को मिटाने के लिए नेपाल के उप प्रधानमंत्री कमल थापा शनिवार को दिल्ली पहुंचे। जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच संबन्ध बहाली को लेकर अपनी आशा प्रकट की।

नए संविधान के लागू होने के बाद से अंतरिक विरोध से जूझ रही नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन दिनों वहां भारत से पहुंचने वाली दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सप्लाई को बहाल करवाना है। पिछले करीब दो महीनों से नेपाल के मधेशी समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच भारत से नेपाल जाने वाले पैट्रोल, डीजल,एलपीजी और खाने पीने की वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई है। कारोबारी मधेशी आंदोलन के चलते अपने आर्थिक नुकसान होने की आशंकाओं के चलते जोखिम नहीं उठाना चाहते।

वहीं दूसरी ओर नेपाली सरकार का विचार है कि नए संविधान के कुछ प्रवधानों को लेकर असंतोष जाहिर कर चुके भारत ने नेपाल को अपनी महत्ता का अहसास करवाने के लिए उसकी जरूरत की वस्तुओं की सप्लाई को रोक दिया है।

बताया जाता है कि इस मुद्दे को लेकर नेपाल सरकार संयुक्त राष्ट्र के समक्ष भी अपनी अर्जी दे चुका है। जिसके बाद दोनों देशों के बीच सालों से बने सहयोगपूर्ण रिश्तों में ज्यादा खटास आ गई। जिसकी प्रतिक्रिया भारत की ओर से भी देखने को मिली उसने इसी सप्ताह भारत-नेपाल सीमा पर यह कहते हुए सख्ती बढ़ा दी कि नेपाल के रास्ते भारत में नकली करेंसी और मादक पदार्थों की तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है।

भारत-नेपाल के रिश्तों के जानकार भी मानते हैं कि नेपाल की भारत पर निर्भरता भले ही एक पहलू हो लेकिन दूसरी ओर भारत के लिए भी यह जरूरी है कि वह नेपाल को चीन के गुट में जाने से रोके। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान के बाद नेपाल के जरिए चीन भारत को घेरने के नए रास्ते बनाना शुरू कर देगा। जिसकी एक झलक हाल ही में देखने को मिली जिसमें चीन ने तिब्बत से सटी अपनी सीमा को नेपाल के सहयोग के लिए खोल दिया। इसलिए यह भी एक सच है कि अगर नेपाल और भारत के बीच संबन्ध खराब हुए तो चीन बिना मौका गवाए नेपाल को पूरा सहयोग करेगा जो उसके लिए सही मायनों में एक सपने के सच होने जैसा होगा।

नेपाल के साथ भारत के रिश्तों के भविष्य को देखते हुए नेपाली उप प्रधानमंत्री कमल थापा की यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। आपको बता दें कि कमल थापा नेपाल के विदेश मंत्री भी हैं।