नेपाल में हिंसक आन्दोलन की पीछे कोई और…

महराजगंज। नेपाल में बने संविधान में थारु जनजाति और मधेशी को अनदेखी करने के कारण व मधेशी राज्य की मांग को लेकर ‘संयुक्त मधेशी मोर्चा’ का आन्दोलन की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही। बल्कि दिन-प्रति दिन स्थिति और भयावह होती जा रही। कुछ जानकारों का कहना है कि नेपाल राष्ट्र की सुरक्षा सौहार्द शांति ब्यवस्था की जिम्मेदारी जिस पुलिस –प्रशासन दी गई है कही न कही वह ही आंदोलन की आग में घी डालने का कार्य कर रहे है।

बची खुची कमी कुछ पहाड़ी मूल के अराजकतत्व पूरा करते नजर आ रहे है। जो सोनौली नो मैस लैंड पर बुधवार को देखने को मिला। दरअसल, बुधवार को नो मैस लैंड रणभूमि की तरह दिख रहा था। पहाड़ी मधेशी एक दूसरे के खून के प्यासे नजर आ रहे थे। जिससे साफ जाहिर हो रहा कि कही न कही इस आग को कुछ लोग और लगाने का प्रयास कर रहे है जिसे नेपाली फ़ोर्स आड़े हाथो समर्थन प्रदान कर रही है।

जिस बात को लेकर कुछ बुद्धजीवी लोग अनहोनी की आशंका व्यक्त कर रहे है वह काफी हद तक जायज भी नजर आ रही है। यह वही लोग हैं जिन्होने आंदोलन का बीज बोया है। वह बहुत सोच समझ के कड़ी दर कड़ी इस आंदोलन को हवा देते नजर आ रहे है जिसका सीधा असर नेपाल की जनता व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

एक चाल की कड़ी है कि दुश्मन को परेशान करने के लिए उसके अर्थ व्यवस्था को नुकसान पहुचाना। दूसरी चाल की दुश्मन के मित्र व पडोसी के बीच में फूट डाल दे ताकि मदद के लिए कोई आगे नहीं आये और दुश्मन कमजोर हो जाये। यह सभी चाल चरितार्थ होती नजर आ रही जिसका सारा खामियाजा नेपाल सरकार को भुगतान पड सकता है।

सोनौली से विजय चौरसिया की रिपोर्ट

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