पीवी नरसिंह राव व मनमोहन सिंह ने रखी देश के आर्थिक प्रगति की बुनियाद: शिवसेना

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने की कवायद मेँ जुटे हो लेकिन शायद उनके ही सहयोगियों को उनकी यह कोशिश रास नहीं आ रही है। यह बात जाहीर होती है राजग के घटक शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे उस लेख से जिसमें देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मोदी की कोशिशों को दरकिनार कर पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह को ज्यादा तवज्जो दी गई है। इसके अलावा इस लेख में केंद्र सरकार की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी व राजीव गांधी की भी प्रशंसा की गई है।

दरअसल, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि  भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे देशों में अत्यधिक लोकप्रिय हैं, लेकिन नरसिंह राव और मनमोहन सिंह जैसे लोगों ने भारत की आर्थिक प्रगति की बुनियाद रखी थी और दूसरे राष्ट्रों के लिए देश के दरवाजे खोले थे। हम उनके योगदान को कैसे भूल सकते हैं। शिवसेना का यह लेख उस समय जनता के सामने आया है जब प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की कोशिश में विदेश दौरे पर हैं। अपने अमेरिका दौरे पर बीते दिन प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी की संस्कृति की निंदनीय बताया था।

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शिवसेना ने कहा कि दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों ने देश की अर्थव्यवस्था को उस समय नई दिशा दी थी जब देश को जरूरत थी। शिवसेना ने कहा कि भले ही मनमोहन सिंह की विचारधारा हमसे मेल नहीं खाती, लेकिन फिर भी हमें यह स्वीकार ही करना होगा कि वह हमारे देश के लिए सर्वश्रेष्ठ करना चाहते थे। पार्टी ने यह भी कहा कि दूरदर्शन और दूरसंचार के क्षेत्र में क्रांति सबसे पहले प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में आई थी जिसे उनके उत्तराधिकारी और बेटे राजीव गांधी ने आगे बढ़ाया था।

शिवसेना ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए लिखा कि दूरदर्शन ने 1982 से पूरे भारत में अपने कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू किया। 15 अगस्त, 1982 को स्वतंत्रता दिवस पर इंदिरा गांधी के राष्ट्र के लिए संबोधन का पहली बार दूरदर्शन पर रंगीन प्रसारण किया गया था। भाजपा के सहयोगी दल ने कहा, बाद में राजीव गांधी कंप्यूटर का युग लाये और उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर गांव में फोन हो और एसटीडी बूथ हों। उन्हें और उनके सलाहकार सैम पित्रोदा को भारतीय दूरसंचार क्षेत्र का रचनाकार समक्षा जाता है।

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