पुलिस ने बैरीकेडिंग करके अख़लाक़ के गांव को किया सील, केजरीवाल को नहीं दी परिजनों से मिलने की अनुमति

दादरी| उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके में गोमांस पकाने की अफवाह में मारे गए अधेड़ मोहम्मद अखलाक के परिवार से मिलने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल शनिवार को दादरी के बिसहड़ा गांव पहुंचे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें गांव में प्रवेश करने से रोक दिया। पुलिस ने बैरीकेडिंग करके गांव को सील कर दिया है। इससे पहले घटना की कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों को स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। मीडियाकर्मियों की गांववालों से झड़प भी हुई।

केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, आशुतोष, कुमार विश्वास भी थे। पुलिस ने गांव की बैरिकेडिंग कर सभी को गांव में जाने से रोक दिया और सभी नेताओं को एनटीपीसी गेस्ट हाउस ले गई। आप नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने जान बूझकर उन्हें गांव में जाने से रोका। केजरीवाल ने ट्वीट किया है कि हमें पुलिस-प्रशासन ने रोक लिया है। महेश शर्मा और ओवैसी को कल नहीं रोका गया। मुझे क्यों रोका गया? मैं सबसे ज्यादा शांतिप्रिय हूं। अखलाक के परिवार से मिलना चाहता हूं।

आप नेता आशुतोष ने कहा कि हमें प्रशासन ने रोका है। आशुतोष ने यह भी कहा है कि इस घटना के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यहां आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम को पीड़ित फैमिली से मिलकर आंसू पोंछना चाहिए। वे देश के लोगों को यह भरोसा दिलाएं कि अब कहीं भी किसी को भी अखलाख की तरह निशाना नहीं बनाया जाएगा। यहां के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं संजय सिंह ने रोके जाने के सवाल पर कहा, प्रशासन से पूछिए, पुलिस हमें यहां लेकर आई है। वहीं गांववालों ने मीडिया के अलावा यहां से आप समर्थकों को भी खदेड़ दिया है।

इस बीच अखलाक की मौत की घटना को कवर करने पहुंचे मीडियाकर्मियों का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की और उनके कैमरों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि मीडिया के गांव में मौजूद रहने से राजनीतिक नेता यहां आते हैं और अपनी राजनीति करते हैं| गांव वालों का कहना है कि हमारे गांव में एक दुर्घटना हुई है, जिसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए|

हम अपने गांव का माहौल सामान्य करने में जुटे हैं,लेकिन राजनेता गांव के माहौल को खराब कर रहे हैं| गौरतलब है कि 30 सितंबर को मोहम्मद अखलाक की हत्या भीड़ ने बीफ खाने का आरोप लगाते हुए कर दी थी और उनके बेटे को भी मार-मार कर अधमरा कर दिया था|

हिंदू परिवार ने दी थी अखलाक के परिवार को पनाह

नफरत की तमाम कहानियों के बीच गांव में सदभाव की बड़ी खबर पता चली है| गांव के हिंदुओं की उग्र भीड़ जब अखलाक के घर को घेरे हुए थी तब पड़ोस में रहने वाले राणा परिवार ने अखलाक के परिवार की तीन महिलाओं, एक पुरुष और एक छोटे बच्चे को अपने घर में शरण देकर जान बचाई| पड़ोस की शशि देवी और विष्णु राणा ने अपने घर में रात भर पहरा दिया और भीड़ से अखलाक के परिवार की हिफाजत की|

शशि देवी गांव के सामाजिक ताने बाने को बेहतर तरीके से जानती हैं लेकिन एक तो हिन्दू धर्म और ऊपर से उत्तेजित भीड़ उन्हें विचलित कर रही थी| उस समय तक उनके पति जो पेशे से प्रोडक्शन इंजीनियर हैं वो भी नहीं आये थे| तकरीबन 11 बजे रात में विष्णु राणा घर वापस आए| रात भर ये हिन्दू परिवार इसलिए जागता रहा ताकि घर में शरण लिए हुए लोग चैन से रह सकें| ये इंसानियत थी जिसने एक दूसरे की मदद की| विष्णु राणा कहते हैं सालों से इस गांव में धर्म जात बिरादरी कोई मुद्दा ही नहीं रहा| अगर कुछ गलत हुआ भी था तो लोग कानून का रास्ता ले सकते थे|