पुलिस फोर्स जॉइन करने के लिए छोड़ दी 18 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी

लखनऊ: पुलिस अपनी जान की बाजी लगाकर समाज की रक्षा करती है। सर्दी गर्मी हो या बरसात पुलिस कभी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नही हटती है। जिन्होने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्राणों की आहुति दे दी। ऐसे पुलिस अफसर व जवानों को हम नमन करते है। पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शहीद पुलिसकर्मियों की पत्नियों को सम्मानित किया|

बुधवार को जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुल्तानपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनीत मिश्र की मां माधुरी मिश्रा को नमस्कार करते हुए हालचाल पूछे तो वह फफक पड़ीं। मुख्यमंत्री के जाते ही विनीत बोला, ‘देखा मां, रुपया-पैसा तो सब कमा लेंगे लेकिन यह सम्मान कम ही लोगों को मिलता है। आज लगा कि पिताजी की शहादत बेकार नहीं गई।

विनीत मिश्र के बारे में बता दें इन्होने पुलिस फोर्स जॉइन करने के लिए 18 लाख रुपये के पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी। वे शहीद कांस्टेबल विजय प्रताप मिश्र के बेटे हैं। अमेठी में उपद्रवियों से मोर्चा लेते हुए पिछले साल 14 सितंबर को विजय शहीद हो गए थे। इस घटना ने विनीत की जिंदगी का मकसद बदल दिया। अब उनकी एक ही जिद है, पुलिस फोर्स जॉइन करने की। विनीत मूलरूप से अंबेडकरनगर के सेमरा गांव के रहने वाले हैं। विनीत ने जब अपना फैसला बताया तो लोगों ने समझाया कि पुलिस में सैलरी बहुत कम है। बहुत तनाव है। छुट्टी नहीं मिलती। लेकिन वे नहीं माने और टीसीएस कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

विनीत का कहना है, पुलिस फोर्स में भर्ती होकर वह परिवार की परंपरा को कायम रखेगा। खाकी और शहादत उसके परिवार की परंपरा रही है। विनीत के पिता जी के साथ-साथ उनके ताऊ कपिल मुनि मिश्र भी सिपाही थे। वर्ष 1984 में उन्नाव के गंगाघाट थाना में तैनाती के दौरान उपद्रवियों की गोली ने उनकी जान ले ली। ताऊ की जगह उनके बेटे घनश्याम मिश्रा को नौकरी मिली। आज वे दरोगा हैं।