प्रधानमंत्री के वादे ढपोरसंखी: राजेन्द्र चौधरी

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि कहावत है झूठ के पैर नहीं होते है। झूठे वादों की कलई शीघ्र खुल जाती है। भाजपा नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव के समय झूठे वादों की मीनार खड़ी कर दी थी। भ्रमजाल में आकर जनता ने उन्हें केन्द्र की सत्ता में बिठा दिया। लेकिन जल्दी ही जनता को पता चल गया है कि प्रधानमंत्री के वादे ढपोरसंखी थे। तब जनता मंहगाई, भ्रष्टाचार और बेकारी से परेशान थी। वादा किया गया था कि इन सबसे निजात मिलेगी। अब डेढ साल होने को आ गए उनका एक भी वादा पूरा नहीं हुआ है।

जनता मंहगाई से त्रस्त है। रोजाना घरों में इस्तेमाल होने वाली अरहर की दाल के भाव आसमान छूने लगे हैं। वर्ष भर पहले इस दाल का दाम 85 रूपए प्रति किलो था। आज बाजार में इसके दाम 200 रुपए प्रतिकिलो हो गए हैं। इससे घरेलू बजट पर संकट हो गया है। लेकिन भाजपा के ही केन्द्र में प्रवासी भारतीय विभाग के राज्यमंत्री का कहना है कि यह तो पहले भी मंहगी थी। लगता है भाजपा को आम आदमी की पीड़ा से कोई वास्ता नहीं हैं।  

मंहगाई रोकने की भाजपा की बात तो अब गुजरे जमाने की बात हो चली है, क्योंकि महीने में दो बार डीजल के दाम ही बढ़ा दिये गये है। डीजल के दामों में 95 पैसे की वृद्धि हो गई है। लेकिन इसके चलते परिवहन मंहगा होने से खाद्य पदार्थ तथा सब्जी-फल आदि की ढुलाई की दरें बढ़ने की सरकार को चिंता नहीं। इसका भार तो आम आदमी को ही उठाना पडे़गा।

भाजपा की गलत आर्थिक नीतियों के चलते निर्यात में लगातार गिरावट आंकी गयी है। स्वंय केन्द्र सरकार ने स्वीकार किया है कि सितम्बर, 2015 में देश के निर्यात में 24.3 फीसद की गिरावट आई है। इसका सीधा असर यह होगा कि उद्योग यूनिटें बंद होने लगेगी और उसमें काम कर रहे लोगों की छंटनी के चलते बेकार होते जाएगें। एक ओर नौजवानों की प्रतिभा का पलायन रोकने की हवाई बातें हो रही हैं तो दूसरी ओर हकीकत में उन्हें बेरोजगारों की लाइन में खड़े होने को मजबूर बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव केन्द्र की नई नीतियों से कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं से लगातार अपनी चिंता जताते रहे हैं। उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार जहाॅ चैमुखी विकास के कदम उठा रही है वहीं केन्द्र का सौतेला व्यवहार रोड़ा बन रहा है। विकास के तेज कदम बढ़ाते हुए उ0प्र0 को 15,257 करोड़ केंद्रांश कम मिलने की आशंका है। यह स्थिति देश के साथ प्रदेश के विकास के लिए भी चिंता एवं क्षोभ का विषय है।