पढ़िए क्या कहा अखलाक के बेटे सरताज, भाई और बचपन के दोस्त ने

ग्रेटर नोएडा| उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के एक गाँव में गोमांस खाने की अफवाह पर भीड़ के हाथों मारे गए अधेड़ मोहम्मद अखलाक का बेटा सरताज भारतीय वायु सेना में तकनीशियन है| सरताज ने पिता के हत्यारों के लिए सजा की मांग की है। उन्होंने कहा, जिन्होंने मेरे पिता की हत्या की है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए। मैं जानना चाहता हूं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। उन्हें सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में गांव का कोई व्यक्ति दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न जुटा पाए।

अपने परिवार के बाकी सदस्यों की जिंदगी पर मंडराने वाले खतरे का डर जाहिर करते हुए सरताज ने कहा कि वह गांव छोड़ने की योजना बना रहे हैं क्योंकि यह घटना दोहराई जा सकती है। उन्होंने कहा, हमारी जिंदगियां खतरे में हैं। मैं यह स्थान छोड़ने की योजना बना रहा हूं। हम यहां से चले जाएंगे क्योंकि ऐसा कभी भी दोबारा हो सकता है। हमें यह आश्वासन कौन देगा कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।

सरताज ने कहा कि उसने लगभग एक घंटे पहले अपने बीमार पिता से बात की थी और सबकुछ ठीकठाक था। सरताज ने कहा, जहां तक मुझे पता है, कोई तनाव नहीं था। सबकुछ सामान्य था। मैंने घटना के एक घंटे पहले अपने पिता से बात की थी और उनका हालचाल पूछा था। उन्हें टायफाइड था और उनका रक्तचाप सामान्य से कम था। बाकी सबकुछ उस समय तक ठीक था। घटना के 25 मिनट बाद मुझे पता चला कि मेरे पिता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है। उन्हें घर से बाहर घसीटकर निकाला गया। निश्चित तौर पर पड़ोसी भी इसमें शामिल थे।

अखलाक के बचपन के दोस्त हैं गुलाम मोहम्मद बताते हैं कि जब कभी वो अखलाक से अपने समाज के लोगों के बीच रहने के लिए कहते वो साफ मना कर देते| अखलाक लोहार का काम करते थे| सीमित आमदनी थी| बहुत कम पढ़े लिखे थे लेकिन प्रगतिशील सोच रखते थे| उनकी जिंदगी का एक ही मकसद था अपने बच्चों ज्यादा से ज्यादा तालीम दिलाना|

अखलाक के छोटे भाई हैं जान मोहम्मद| जान बताते हैं कि अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकिन वो हमेशा गंभीर रहे| एक बेटे को पढ़ाने के बाद भारतीय वायुसेना में भेजा| दूसरा बेटा दानिश सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था| लेकिन दानिश इस समय जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है| एक बेटी की शादी कर चुके थे और सबसे छोटी बेटी की शादी करने की सोच रहे थे|

अख़लाक़ पांचों वक्त के नमाज़ी थे| सच बोलने पर बहुत ज़ोर देते थे| अख़लाक़ की मां अपने चार बेटों के बावजूद अख़लाक़ के साथ ही रहना पसंद करती थीं| अख़लाक़ के बड़े भाई जमील अहमद इस बात को कभी नहीं भूल पाएंगे कि अख़लाक़ शनिवार से ही उन्हें फोन कर रहे थे कि भैया आ जाइये साथ खाना खाने का मन कर रहा है| सोमवार शाम भी अख़लाक़ ने उन्हें कई फोन किये कि आ जाइये साथ खाने का मन है| लेकिन वो दिन नहीं आया और अब कभी नहीं आएगा|

अखलाक की पत्नी इकराम ने कहा है कि हमारा एक देशभक्त परिवार है। हमारा बड़ा बेटा भारतीय वायुसेना में है। दानिश इसी साल स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाला है। वह भी सेना में शामिल होना चाहता है।