फरीदाबाद दलित कांड में नया मोड़, आरोपी परिवार ने कहा पीड़ित परिवार ने खुद लगाई आग

नई दिल्ली। हरियाणा के फरीदाबाद से लगी बल्लभगढ़ के सुनपेड़ गांव में दलित परिवार के चार सदस्यों पर पेट्रोल डालकर जिन्दा जलाने के मामले में अबतक दो बच्चों की मौत हो चुकी है, मृत बच्चों की मां 75 फीसदी जलने के बाद अस्पताल में जिन्दगी मौत के बीच जूझ रही है। हरियाणा की खट्टर सरकार ने परिजनों की मांग पर घटना की जांच सीबीआई को सौंप दी, तो इससे पहले ही राज्य सरकार की ओर से 10 लाख की आर्थिक मदद और भविष्य में सरकारी नौकरी देने की एलान कर दिया था। कार्रवाई के नाम पर पुलिस छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, तो दो पुलिस अधिकारियों के अलावा दलित परिवार की सुरक्षा में तैनात छह पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया है। वहीं दूसरी ओर इस मामले को जातिगत हिंसा के मामले की तरह सियासी तूल देने का क्रम शुरू हो चला है, जबकि इस घटना को स्पष्ट रूप से दो परिवारों के बीच निजी रंजिश कहा जा रहा है, जो एक साल पहले ही घटी उस घटना की प्रतिक्रिया बताई जा रही है जिसमें पीड़ित परिवार के कुछ सदस्यों ने आरोपी सवर्ण परिवार के पांच लोगों को मामूली विवाद में गोली मारी थी। उस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी।

इस मामले में नया मोड़ समय आ गया जब इस मामले में पीड़ित परिवार द्वारा आरोपी बनाए गए सवर्ण परिवार की महिलाओं ने मीडिया के सामने आकर कहा कि मौजूदा घटना से उनका कोई लेना देना नहीं है। इस वारदात को दलित परिवार ने स्वयं ही अंजाम दिया है। मीडिया उन्हें दबंग बता रही है जबकि पिछले साल की घटना के बाद उनके परिवार की माली हालत ऐसी तक नहीं बची है कि उनका परिवार अपने खर्चों तक को पूरा कर पाए। उनका परिवार पट्टे की जमीनों पर खेती कर जैसे तैसे गुजर बसर करता है। पिछले साल की घटना के बाद उनके खेतों की फसल खेतों में ही नष्ट हो गई थी, इस साल फिर उनके साथ ऐसा ही होने वाला है। उनके परिवार को लोगों को फंसाया जा रहा है।
आरोपी सवर्ण परिवार का आरोप है कि जिस दंपत्ति के परिवार पर पेट्रोल डाल कर जलाने का प्रयास हुआ उनके बीच पिछले एक साल से अनबन की खबरें सुनने को मिलती रहीं हैं। दोनों के बीच झगड़ा था। उन्होंने खुद ही घटना को अंजाम देकर खुद को बचाने के लिए आरोप उनके परिवार के सिर मढ़ दिए है।

इस परिवार का आरोप है कि सवर्ण होने के नाते ही उनके साथ भेदभाव हो रहा है। पिछले साल उनके परिवार के पांच युवाओं पर जानलेवा हमला हुआ था जिसमें तीन की मौत हो गई थी और दो की हालत अभी तक ऐसी है जो कोई काम नहीं कर पाते। स्थानीय पुलिस ने भी दलितों को ही सुरक्षा प्रदान की थी। इस मुद्दे पर सियासतदानों की प्रतिक्रिया की आलोचना करते हुए परिवार ने कहा कि हमारे परिवार के तीन लोग भी पिछले साल मारे गए थे तब कोई राहुल गांधी नहीं दिखे। उनकी विधवाओं और बच्चों की सुध लेने वाली कोई सरकार नजर नहीं आई थी।