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बांस की टोकरी बेच घर चलाती थी मां, स्टेशन पर पढ़कर लकड़ी काटने वाला मजदूर बना IAS अफसर

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: आज के समय में ज्यादातर युवा अच्छी नौकरी और आराम की जिंदगी चाहते हैं, वहीं कुछ ऐसे युवा भी हैं जो अपने काम से समाज में मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे ही युवाओं को सलाम करते हुए हम आप तक लेकर आ रहे हैं ऐसे जांबाज अफसरों की कहानी, जो कुछ कर दिखाने का जज्बा और काम के प्रति जुनून दर्शाता है…

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घर में शराबी पिता ने शराब के लिए सबकुछ बेच डाला। आर्थिक तंगी की वजह से मां ने बांस की टोकरियां बनाकर बेची और किसी तरह परिवार का गुजारा किया। कुछ साल पहले तक जिस परिवार से गांव में कोई भी बात करना पसंद नहीं करता था, आज उसी परिवार के बेटे ने सफलता का मुकाम हासिल करते हुए पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। प्रभाकरन तमिलनाडु के तंजावुर जिले के रहने वाले हैं। बचपन से ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मां और बहन बांस की टोकरियां बुनकर घर का गुजारा चलाती थी। प्रभाकरन पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन शराबी पिता की वजह से घर की सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई।

परिवार की जिम्मेदारियों के कारण प्रभाकरन ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले यह सपना छूट गया। पढ़ाई छोड़ने के बाद प्रभाकरन आरा मशीन में लकड़ी काटने का काम करने लगे। करीब 2 साल तक यहां काम करने के बाद उन्होंने मजदूरी भी की। लेकिन, पढ़ने-लिखने में दिलचस्पी उनकी कम नहीं हुई। वह मजदूरी करने के बाद खाली समय में स्टेशन चले जाते और वहां बैठकर पढ़ाई करते।

बताते हैं कि प्रभाकरन रात में अपना ज्यादातर समय सेंट थॉमस रेलवे स्टेशन पर बिताया करते थे। एक दिन उनके दोस्त ने उन्हें सेंट थॉमस माउंट के बारे में बताया। उन्हें पता चला कि यहां पिछड़े वर्ग के लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। प्रभाकरन ने जीतोड़ मेहनत की और आखिरकार उन्होंने IIT का एक्जाम क्रैक कर लिया। IIT की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रभाकरन ने M.Tech में एडमिशन लिया और यहां भी उन्होंने टॉप रैंक हासिल की।

M.Tech करने के बाद भी प्रभाकरन का पढ़ाई के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने 2017 में UPSC की परीक्षा दी और 101वीं रैंक हासिल की। 990 कैंडिडेट्स के बीच चौथी बारी में प्रभाकरन ने यह मुकाम हासिल किया। UPSC क्लीयर करना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। UPSC की परीक्षा पास करने वाले शिवागुरू प्रभाकरन जब ट्रेनिंग पूरी कर अपने गांव पहुंचे तो वहां के लोग हैरान थे। एक लकड़ी काटने वाले मजदूर की यह सफलता देख पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। IAS अफसर बनने के बाद शिवागुरू प्रभाकरन ने अपने छोटे भाई की पढ़ाई करवाई और फिर बहन की शादी भी की।

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