यादव सिंह के ठिकानों पर सीबीआई के छापे, जल्द ही संरक्षण देने वाले राजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स पर कसेगा शिकंजा

लखनऊ: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह के खिलाफ घोटाले में साक्ष्य की तलाश को लेकर सीबीआई ने गुरुवार को नोएडा और गाजियाबाद के 12 ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई की यह छापेमारी यादव सिंह के आवास, प्राधिकरण के कार्यालय, फर्जी फर्मों के निदेशकों के आवासों व कार्यालयों, होटल और दो कंपनियों के एक संयुक्त उद्यम के कार्यालय व आवास पर हुई। जहां से सीबीआई ने कई संपत्तियों के दस्तावेज, दिए गए ठेकों से संबंधित दस्तावेज, कार्यालय का कंप्यूटर, आईपैड और लैपटॉप कब्जे में ले लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण में हजारों करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह के खिलाफ चल रही सीबीआई जांच में गुरुवार को सीबीआई ने छापेमारी की। सीबीआई की आधा दर्जन टीमों ने देर शाम तक नोएडा और गाजियाबाद स्थित कई कंस्ट्रक्शन कंपनियों के कार्यालयों, निदेशकों के आवासों, होटल व प्राधिकरण के कार्यालय को खंगाला। जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सीबीआई ने नोएडा सेक्टर-51 स्थित यादव सिंह के आवास और सेक्टर-29 स्थित होटल में छापेमारी करके कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कब्जे में ले लिया। जिसके बाद कूट रचित दस्तावेज तैयार कर बनाई गईं चार फर्जी फर्मों के निदेशकों के आवासों पर छापेमारी करके फर्म से संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में लिया।

वहीं घोटाले की रकम का अपने करीबियों के जरिए जिन कंपनियों में निवेश किया गया था, सीबीआई ने उन कंस्ट्रक्शन कंपनियों एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड, पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी आनंद बिल्टेक प्राइवेट लिमिटेड, जेएसपी प्राइवेट लिमिटेड, त्रिरूपति कंस्ट्रक्शन लिमिटेड और गोल्ड लिंक अस्पताल के कार्यालय व निदेशकों के आवास पर छापेमारी की। जहां से कई कंप्यूटर, लैपटॉप, आईपैड व कई महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में ले लिए। उल्लेखनीय है कि घोटाले को लेकर यादव सिंह और उनके परिवार के सदस्यों व करीबियों के खिलाफ सीबीआई ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। जिसमें पहली एफआईआर में यादव सिंह के अलावा उनकी पत्नी कुसुम लता, बेटी गरिमा भूषण, बेटा सन्नी,बिजनेस पार्टनर राजेन्द्र मनोचा व एक अन्य को आरोपी बनाया गया है।

उधर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी यादव सिंह और उनके करीबियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी। ईडी ने इसके लिए सीबीआई से यादव सिंह पर दर्ज मुकदमों की कॉपी हासिल कर ली है। ईडी ने इसके साथ ही आयकर विभाग द्वारा यादव सिंह के यहां पहले की गई छापामारी से संबंधित रिपोर्ट व ब्यौरा हासिल कर लिया है। ईडी के अफसरों के मुताबिक सीबीआई से उसके द्वारा यादव सिंह के खिलाफ अभी तक हुई कार्रवाई का भी ब्यौरा मांगा गया है। इस बीच ईडी ने अपने स्तर से भी यादव सिंह प्रकरण से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई है। इसमें सपा सरकार द्वारा यादव सिंह के खिलाफ जांच बैठाने, उन्हें निलंबित करने और फिर बहाल करने व जांच एजेंसी सीबीसीआईडी द्वारा यादव सिंह को क्लीन चिट दिए जाने की जानकारियां शामिल हैं।

ईडी अफसरों का कहना है कि यादव सिंह व उनके करीबियों से जुड़ी फर्मों की जानकारी हासिल करने के साथ-साथ अभियंता के कारोबारी साझेदारों के बारे में जानकारी जुटाई गई है। यह भी पता किया गया है कि अभी तक यादव सिंह की कितनी संपत्ति और कहां-कहां सामने आई है। कितनों के दस्तावेज बरामद हुए हैं और बैंक खातों की क्या स्थिति है। सूत्र बता रहे हैं कि औपचारिक जांच शुरू होने के बाद अब यादव सिंह के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है। इसका ड्राफ्ट दो-तीन दिन में तैयार हो जाएगा। इस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद ईडी जांच में सामने आ रही यादव सिंह की आय से अधिक संपत्ति को अटैच करने की कार्रवाई शुरू करेगी। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि जल्द ही यादव सिंह के परिवारीजनों, रिश्तेदारों के अलावा पूर्व व वर्तमान सरकार के कुछ राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स पर भी हाथ डाल सकती है।